लखीसराय : नीट पुनर्परीक्षा के दौरान लखीसराय में फर्जी परीक्षार्थियों के माध्यम से कदाचार कराने की बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में पुलिस ने विभिन्न राज्यों के 12 मेडिकल छात्रों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि संगठित गिरोह परीक्षा व्यवस्था में सेंध लगाकर अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा दिलाने की तैयारी में था।
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गिरफ्तार आरोपियों में झारखंड की दो छात्राएं भी शामिल हैं। इनमें पलामू की रहने वाली चंचल कुमारी ओड़िशा में आयुर्वेद चिकित्सा की छात्रा है, जबकि गिरिडीह की पूनम काशी हिंदू विश्वविद्यालय में परिचर्या विषय की छात्रा है। दोनों पर फर्जी परीक्षार्थी बनकर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने की साजिश में शामिल होने का आरोप है। पूनम पर आरोप है कि वह मोटी रकम के बदले किसी अन्य अभ्यर्थी के स्थान पर ‘डमी कैंडिडेट’ (सॉल्वर) बनकर परीक्षा दे रही थी.
गिरिडीह की बरहमसिया गांव निवासी है पूनम
जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार पूनम कुमारी गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड अंतर्गत बरहमसिया गांव की रहने वाली है. वह वर्तमान में प्रतिष्ठित बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में बीएससी नर्सिंग की छात्रा है. पुलिस प्रशासन और जांच एजेंसियों के मुताबिक, पूनम को परीक्षा केंद्र से दूसरे परीक्षार्थी की जगह पेपर हल करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया. इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब पूरे सॉल्वर नेटवर्क और इसके मास्टरमाइंड की तलाश में जुट गई है.
मेडिकल छात्र मुख्य सरगना
बता दें कि रविवार को नीट यूजी परीक्षा में सॉल्वर गैंग के हुए पर्दाफाश के बाद से लखीसराय पुलिस की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह ने पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था में ही सेंध लगा दी थी। बायोमेट्रिक जांच से जुड़े कर्मियों की मिलीभगत से फर्जी परीक्षार्थियों को वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा केंद्र के अंदर प्रवेश दिलाया गया था।
मेडिकल छात्र बना बायोमेट्रिक स्टाफ
अब तक की जांच में यह खुलासा हुआ है कि पावापुरी मेडिकल कॉलेज का छात्र रविशंकर इस नेटवर्क का मुख्य संचालक था। उसने विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे छात्रों को साल्वर के रूप में तैयार कर परीक्षा में बैठाने की योजना बनाई थी।
जांच में सामने आया है कि पटना मेडिकल कॉलेज के चतुर्थ वर्ष के छात्र एवं हाजीपुर निवासी मयंक कश्यप ने अंकित कुमार की पहचान पर बायोमेट्रिक स्टाफ के रूप में काम किया। आरोप है कि इसी माध्यम से गिरोह ने बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावित किया और सॉल्वरों को केंद्र के भीतर प्रवेश दिलाने में सफलता हासिल की। इसके बाद फर्जी परीक्षार्थी वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा में शामिल हुए।




