रांची: देश में एक अप्रैल से जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। बुधवार को पहला फेज़ होगा, और इस बार इसकी प्रक्रिया पहले से अलग तरीके से होगी, इसमे पूरी प्रक्रिया डिजिटली की जाएगी। जियो-रेफरेंसिंग का इस्तेमाल किया जाएगा. ताकी कीसी भी मकान की गिनती न छूटे और कीसी की दो बार गिनती भी न हो। ये जनगणना वैसे तो 2021 में ही होनी वाली थी लेकिन कोविड के कारण इसको तब टाल दिया गया था और अब ये जनगणना होगी, जिसमे एक साल तक का काम होगा।
रजिस्ट्रार जनरल और सेंसस कमिश्नर का कहना है कि, भारत अपना पहला पुरी तरह से डिजिटल जनगणना कर रहा है, जीसके लिए पुरी तैयारी हो गई है। पहले फेज़ में हाउस लिस्टिंग की जाएगी. जिसमें मकानो और लोगोम के घरों से जुड़ी जानकारीयां जुटाइ जांएगी। उसके बाद दूसरा फेज़ होगा जहां जनसंख्या को गीना जाएगा (population census) होगी जिसकी प्रक्रिया फरवरी 2027 से शुरू होगी। जम्मू कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में यह चरण सितंबर 2026 से ही शुरू हो जाएगा. इस चरण में जातियों की गिनती भी की जाएगी।
और आजादी के बाद पहली बार जाती से जुड़े डाटा भी इककट्ठा किए जाएंगे, इस जनगणना में। इससे पहले ऐसा 1931 कि जनगणना में किया गया था। ये 8 वीं जनगणना है। इसमें 30 लाख एन्युमरेटर्स, सुपरवाइजर और अधिकारी शामिल होंगे। देश में पहली बार सेल्फ एन्युमरेशन का ऑप्शन भी होगा। इसके लिए ऑनलाइन एक वेब पोर्टल होगा, जहां सर्वे से पहले लोग अपनी जानकारियाँ उसमे खुद फिल कर सकेंगे, और ये एक या दो भाषा में नहीं बल्कि 16 भाषाओं में होगा।


