न्यूज डेस्क: नीट-यूजी पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार शाम एक छात्र को गिरफ्तार किया है। सीबीआई के अनुसार, पुणे की स्कूल हेडमिस्ट्रेस मनीषा हवालदार ने छात्र को फिजिक्स के सवाल मौखिक रूप से बताए थे। छात्र ने उन सवालों को लिखकर उनकी तस्वीरें लीं और बाद में वे तस्वीरें हवालदार के पति को भेज दीं। जांच एजेंसी का कहना है कि इसके बाद हस्तलिखित दस्तावेज को नष्ट कर दिया गया ताकि सबूत मिटाए जा सकें। सीबीआई ने यह भी बताया कि हवालदार ने सवाल साझा करने के बदले छात्र से पैसे लिए थे। इस गिरफ्तारी के साथ ही मामले में अब तक कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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अदालत ने ट्रांजिट रिमांड पर भेजा
जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। सीबीआई के मुताबिक, अन्य आरोपियों ने छात्र का मोबाइल नंबर अपने फोन में गॉड नाम से सेव कर रखा था। एजेंसी इसे मामले में छात्र की अहम भूमिका का संकेत मान रही है। गिरफ्तारी के बाद छात्र को सीबीआई कोर्ट के जज आर आर मेंडे के सामने पेश किया गया। अदालत ने उसे ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया है, ताकि सीबीआई उसे आगे की पूछताछ के लिए दिल्ली ले जा सके।
23 पन्नों में लिखे सवाल और नकदी बरामद
जांच एजेंसी ने अब तक की कार्रवाई में 23 पन्नों में लिखे फिजिक्स के सवाल, नीट परीक्षा के मूल प्रश्नपत्र, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के आधिकारिक प्रमाणपत्र और नकदी बरामद की है। सीबीआई के अनुसार, पूछताछ में मनीषा हवालदार ने स्वीकार किया कि अप्रैल महीने में उन्होंने याददाश्त के आधार पर फिजिक्स के सवाल दोबारा तैयार किए थे और उन्हें एक छात्र के साथ साझा किया था। मनीषा हवालदार ने पूछताछ में दावा किया कि यह काम उन्होंने एनटीए से जुड़े एक केमिस्ट्री विशेषज्ञ के कहने पर किया था। बाद में सह-आरोपी मनीषा मंधारे के कहने पर उन्हीं सवालों को मैसेजिंग ऐप के जरिए आगे भेजा गया। सीबीआई ने अदालत को बताया कि हवालदार द्वारा बताए गए सवाल नीट परीक्षा के असली प्रश्नों से काफी हद तक मेल खाते थे।
पहले भी हो चुकी हैं कई गिरफ्तारियां
इस मामले में इससे पहले भी कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सीबीआई ने पी वी कुलकर्णी को गिरफ्तार किया था, जो नीट-यूजी प्रश्नपत्र तैयार करने वाली एनटीए टीम से जुड़े थे। इसके अलावा ब्यूटी पार्लर चलाने वाली मनीषा वाघमारे और कंसल्टेंसी फर्म संचालक धनंजय को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। सीबीआई अब पूरे नेटवर्क और पेपर लीक में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र किन-किन लोगों तक पहुंचा और इसके बदले कितनी रकम का लेनदेन हुआ।
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