Thursday, July 23, 2026

आदिवासियों को पारंपरिक, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर कमजोर कर रही है भाजपा : बंधु तिर्की

रांची/ गुवाहाटी : पूर्व मंत्री, झारखण्ड सरकार की समन्वय समिति के सदस्य, झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष और वरीय पर्यवेक्षक बंधु तिर्की ने कहा है कि असम सहित देश भर की भाजपा सरकारें आदिवासियों को उनकी पारंपरिक और सामाजिक पहचान के साथ ही आर्थिक स्तर पर भी कमजोर कर रही है जो दुर्भाग्यपूर्ण है.

बंधु तिर्की ने कहा कि पूरी दुनिया में आदिवासियों के रीत-रिवाज, उनकी भाषा और संस्कृति ही उनकी असली पहचान है. आदिवासी अपनी विशिष्ट संस्कृति, परंपरा और जीवन शैली के साथ ही प्रकृति के प्रति अपनी व्यावहारिक सोच के कारण अन्य समुदायों से बिल्कुल अलग हैं. पर भाजपा इस बात को बहुत बढ़िया तरीके से समझते हुए भी सांप्रदायिकता का घिनौना खेल खेल रही है और कांग्रेस इस बात को बखूबी समझती है.

आज असम के तीन जिलों, घोड़ामारी, तेज़पुर और सोनीतपुर के विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों, जिला के प्रभावी आदिवासी जनप्रतिनिधियों और आदिवासी छात्र यूनियन के पदाधिकारियों के साथ अपनी विशेष बैठक में श्री तिर्की ने कहा कि भाजपा की मंशा हमेशा से यही रही है कि आदिवासियों और उनके समुदाय को राजनीतिक पटल से दूर रखा जाये और किसी समुदाय को शासन-सत्ता से दूर रखकर कोई देश आगे नहीं बढ़ सकता.

बैठक में असम के आदिवासी समुदाय की पारंपरिक एवं सामाजिक पहचान के साथ ही आर्थिक भेदभाव किये जाने का पुरजोर विरोध किया गया. बैठक में सभी ने जोर देकर कहा कि भाजपा राज में आदिवासियों के साथ हमेशा से भेदभाव होता रहा है. कांग्रेस ने आदिवासियों को आरक्षण का लाभ देकर पूरे देश में विशिष्ट पहचान दिलायी थी लेकिन आज भाजपा सरकार ने इस समुदाय को हाशिये पर लाकर खड़ा कर दिया है.

वरीय कांग्रेस नेता ने कहा कि कांग्रेस की नीति हमेशा से धर्म, जाति और संप्रदाय से ऊपर उठकर इन वंचित समुदायों को एक पहचान दिलाने की रही है और इसी नीति पर कांग्रेस हमेशा ही आगे बढ़ती रहेगी. श्री तिर्की ने भरोसा जताया कि आसन्न चुनाव में कांग्रेस न केवल शानदार जीत दर्ज करेगी बल्कि वह असम में पटरी से उतर चुकी शासन-सत्ता और व्यवस्था को पुन: उसके पुराने स्वरूप में वापस लौटायेगी.

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एयर नाऊ स्पेशल

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न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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