उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश सरकार ने खिलाड़ियों के लिए बड़ा फैसला लेते हुए वाराणसी के डा. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम, सिगरा को नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने और उसके संचालन, प्रबंधन व उसके रखरखाव की जिम्मेदारी भारतीय खेल प्राधिकरण यानी (साई) को सौंपने के एमओयू (MOU) को स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही भारत सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, ट्रेनिंग कैंपों और उससे संबंधित गतिविधियों में शामिल होने की पूरी अवधि आवागमन समेत अब नियुक्त खिलाड़ियों की सेवा अवधि (ड्यूटी) मानी जाएगी।
वाराणसी का यह वही स्टेडियम है जहां ‘खेलो इंडिया’ योजना के तहत आधुनिक खेल की विकसित की गई है। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद अब स्टेडियम परिसर की सभी सुविधाएं, उसकी भवन, ढांचे, मैदान और अन्य व्यवस्थाएं साई को सौंपी जाएंगी। साई यहां राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करेगा, जिसमें खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण दिया जाएगा। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शुरू होने के बाद हर वर्ष करीब 180 खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय ट्रेनिंग दी जाएगी। बाक्सिंग, कुश्ती, तलवारबाजी और शूटिंग जैसे खेलों में उभरते खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रशिक्षण यानी ट्रेनिंग दिया जाएगा। इस पर लगभग 13.50 करोड़ रुपये का वार्षिक खर्च प्रस्तावित किया गया है। फिलहाल देशभर में साई के 23 उत्कृष्टता केंद्र चल रहे हैं, जिनमें वाराणसी का यह केंद्र नया जुड़ाव होगा।
उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि इस पहल से यूपी की प्रतिभा को बड़ा मंच मिलेगा, खिलाड़ियों का करियर मजबूत होगा और वाराणसी अब देश के प्रमुख खेल शहरों में शामिल हो जाएगा। जल्द ही यहां इन खेलों का उत्कृष्ट प्रशिक्षण भी शुरू हो जाएगा। अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों की वर्षों पुरानी समस्या खत्म करते हुए साफ कर दिया है कि प्रतियोगिताओं और प्रशिक्षण के दौरान की पूरी अवधि ड्यूटी के रूप में मानी जाएगी।
अब तक अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता की सीधी भर्ती नियमावली-2022 में हुई थी, इस बारे में स्पष्ट प्रविधान न होने से खिलाड़ियों को अनुमति लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। उन्हें इसके लिए छुट्टी लेनी पड़ती थी। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत नियुक्त खिलाड़ी जब भी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता, प्रशिक्षण शिविर या कैंप में भाग लेंगे, तो उसकी पूरी अवधि सेवा अवधि के रूप में मानी जाएगी।
उनके द्वारा की गई यात्रा की समय भी इसमें शामिल होगा। अपने विभागाध्यक्ष से अनुमति लेकर वह प्रतियोगिता या शिविर के लिए जा सकेंगे। इससे खिलाड़ियों को तैयारी और प्रतियोगिताओं में भाग लेने में कोई प्रशासनिक बाधा नहीं आएगी और प्रदेश का प्रतिनिधित्व भी और मजबूत होगा।


