रांची : झारखं ड सरकार के कार्मिक विभाग की ओर से बीते 18 अगस्त को जारी विभिन्न अधिसूचनाओं के जरिए रद्द की गई जेएसएससी सीजीएल व जेपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं व नियुक्ति पर लगी रोक मामले में आज मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होगी. जस्टिस दीपक रोशन की कोर्ट में आज होने वाली सुनवाई के पहले पिछले महीने 20 से 22 अगस्त में अलग अलग तारीखों में हुई सुनवाई में झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर रोक लगाते हुए सरकार से जवाव दाखिल करने को कहा था.
जिन नियुक्तियों पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई थी, उसमें जेएसएससी सीजीएल के अलावा झारखंड लोक सेवाल आयोग संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2023, सीडीपीओ भर्ती परीक्षा 2023, फूड सेफ्टी ऑफिसर्स परीक्षा 2023 भी शामिल है. नियुक्तियों को रद्द किए जाने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ विभिन्न विभागों में कार्यरत व चयनित अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिका में जेपीएससी ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है. आयोग की ओर से दाखिल प्रति-शपथ पत्र में राज्य सरकार के फैसले का बचाव करते हुए याचिका को खारिज करने की मांग की गई है. जेपीएससी के उप सचिव सुधीर कुमार की ओर से हाईकोर्ट में शपथ पत्र पेश किया गया है.
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आयोग ने अदालत को बताया कि विज्ञापन संख्या 21/2023 के तहत शुरू की गई बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) भर्ती प्रक्रिया को राज्य सरकार ने 18 अगस्त 2026 की अधिसूचना के जरिए रद्द कर दिया था. जिसके बाद याचिकाकर्ताओं सुभाष मुर्मू एवं अन्य ने इस अधिसूचना को चुनौती देते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की है.
जेपीएससी ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने का निर्णय राज्य सरकार ने अपनी प्रशासनिक और कार्यकारी शक्तियों का प्रयोग करते हुए परिस्थितियों के उचित आकलन के बाद लिया है. आयोग के मुताबिक केवल इसलिए कि भर्ती प्रक्रिया किसी एक निश्चित चरण तक पहुंच चुकी है सरकार के पास चयन प्रक्रिया को समाप्त करने या रद्द करने की शक्ति खत्म नहीं हो जाती. शपथ पत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार सार्वजनिक रोजगार से जुड़ी नीतियों और प्रशासन के लिए जिम्मेदार सक्षम प्राधिकारी है. इसलिए अगर परिस्थितियां मांग करती हैं तो सरकार को किसी भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा करने या उसे रद्द करने का पूरा वैधानिक अधिकार प्राप्त है.
इसके साथ ही आयोग ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहे हैं कि सरकार की यह अधिसूचना बिना किसी अधिकार क्षेत्र के जारी की गई है. इन तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर आयोग ने अदालत से अनुरोध किया है कि याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर यह रिट याचिका सुनवाई के योग्य नहीं है और इसे खारिज कर दिया जाना चाहिए.
बता दें कि जेपीएससी की ओर से आयोजित की गई अलग अलग परीक्षाओं के जरिये हुई भर्तियों को सरकार ने रद्द कर दिया है. जिसके बाद इन परीक्षाओं के ज़रिए नियुक्त किए गए कर्मचारियों और अधिकारियों ने हाईकोर्ट की शरण ली है और सरकार के आदेश को चुनौती दी है. अब तक हुई सुनवाई में प्रार्थियों को राहत मिली है और हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है. लेकिन जैसे जैसे इस मामले में अदालत सुनवाई करेगा वैसे वैसे यह देखना काफ़ी महत्वपूर्ण होगा कि कोर्ट का रुख़ क्या होगा.


