Monday, September 21, 2026

तमिलनाडु: मदुरै कोर्ट का बड़ा फैसला, हिरासत में पिता-पुत्र की मौत के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड

चेन्नई : तमिलनाडु के सथानकुलम में पिता-पुत्र जयराज और बेनिक्स की हिरासत में मौत के मामले में मदुरै कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. नौ पुलिसकर्मियों, जिनमें इंस्पेक्टर श्रीधर भी शामिल हैं, को दोहरी मौत की सजा दी गई है. कोर्ट ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला बताया, यह कहते हुए कि यह फैसला भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक निवारक का काम करेगा और समाज की अंतरात्मा को दर्शाएगा.

सिर्फ उम्रकैद काफ़ी नहीं

सजा सुनाते हुए, जज ने कहा, सजा ऐसी होनी चाहिए जो भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए एक रोकथाम का काम करे. उन्होंने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए सिर्फ उम्रकैद काफ़ी नहीं होगी. जज ने कहा, फैसले में समाज की अंतरात्मा दिखनी चाहिए, उन्होंने कहा कि इस घटना ने सामूहिक अंतरात्मा को बहुत झकझोर दिया है.

जज मुथुकुमारन ने निहत्थे पिता और बेटे को पूरी रात बेरहमी से टॉर्चर करने को रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामलों में बांटा. उन्होंने कहा कि चूंकि दोषी पढ़े-लिखे अधिकारी थे, इसलिए यह कोई आम अपराध नहीं था और सिर्फ उम्रकैद की सजा पुलिस डिपार्टमेंट में डर पैदा करने में नाकाम रहेगी.

जज ने कहा, दोनों लोगों को पुलिस स्टेशन में कस्टडी के दौरान पुलिस टॉर्चर किया गया और उनकी मौत हो गई. बिना हथियार के होने के बावजूद, स्टेशन पर कस्टडी के दौरान पूरी रात उनके साथ मारपीट की गयी. दोनों बिजनेसमैन थे, समाज में अच्छी पहचान वाले लोग थे.

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सजा कम करने की अपील स्वीकार नहीं

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, ऐसा लगता है कि उन दोनों के खिलाफ कोई क्रिमिनल केस पेंडिंग नहीं था. इस आधार पर सजा कम करने की अपील कि दोषियों के परिवार उन पर निर्भर हैं, स्वीकार नहीं की जा सकती. सजा पूरी तरह से जुर्म के नेचर के आधार पर तय की जानी चाहिए. चूंकि दोषियों ने अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल किया है, इसलिए इसे एक गंभीर जुर्म माना जाना चाहिए. जो लोग जनता के पैसे से सरकारी सैलरी लेते हैं, वे आर्थिक तंगी या मानसिक तनाव को कम करने वाली वजह नहीं बता सकते.

इस घटना की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी. सीबीआई ने गहन जांच करते हुए मदुरै जिला न्यायालय में 2,427 पृष्ठों की आरोपपत्र दाखिल की. ​​इसके आधार पर, पिता-पुत्र की लॉकअप में हुई हत्या के मामले में गिरफ्तार सभी 9 पुलिस अधिकारियों को दोषी पाया गया.

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