एयरनाउ डेस्क: घाटशीला विधानसभा उपचुनाव के लिए नामांकन शुरू हो गया है। लेकिन अभी तक किसी भी उम्मीदवार का नाम ऐलान नहीं हुआ है, चाहे झारखंड मुक्ति मोर्चा की बात करें या भाजपा की। लेकिन इसी बीच 13 अक्टूबर को JLKM ने एक बैठक की और उसमे घटशीला विधानसभा उपचुनाव के लिए अपना प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर दिया है। JLKM ने ये डिसाइड कर लिया है की वो किसी और पार्टी के साथ नहीं जुड़ेगा, समर्थन नहीं देगा और अपना खुद का उम्मीदवार उतारेगा। पार्टी ने सोमवार को तोपचाची में jlkm की केन्द्रीय बैठक में ये निर्णय सबके साथ मिलकर लिया गया। जानकारी मिली है कि भाजपा ने jlkm को समर्थन करने का भी ऑफर किया, लेकिन पार्टी ने भाजपा को समर्थन करने से साफ मना कर दिया और अपना खुद का उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है।
भाजपा की अगर बात करें तो अभी तक भाजपा ने खुलके कुछ नहीं कहा है।
2024 के चुनाव में झामुमो के रामदास सोरेन ने भाजपा के प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन को हराकर यह सीट जीती थी। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी एक बार फिर चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन पर दांव लगा सकती है. 2024 चुनाव में भी जेएलकेएम ने यहां से अपना उम्मीदवार दिया था। जेएलकेएम से रामदास मुर्मू उम्मीदवार थे और उनको 8092 मत मिला था। इतना मत लाकर तीसरा स्थान हासिल किया था उन्होंने । जेएलकेएम के केंद्रीय अध्यक्ष सह डुमरी विधायक जयराम महतो ने बताया कि घाटशिला उपचुनाव को लेकर तोपचांची में हुई केंद्रीय समिति की बैठक में शामिल हुआ। तोपचांची के प्रकृति, पहाड़ और जंगल के बीच जयराम महतो ने पार्टी के अन्य साथियों के साथ घाटशिला उपचुनाव को लेकर गहन चर्चा की। उसमे विचार विमर्श के बाद पार्टी ने घाटशिला उपचुनाव लड़ने का निर्णय लिया गया। पार्टी मजबूती से चुनाव लड़ेगी। जल्द ही संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद प्रत्याशी की घोषणा कर दी जाएगी। जानकारी के अनुसार जेएलकेएम जल्द प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर देगा. इसके लिए केंद्रीय कमेटी द्वारा गठित एक टीम घाटशीला विधानसभा का दौरा करेगी. वहां से प्राप्त सूचना के आधार पर नाम का चयन करेगी. जिसके बाद प्रत्याशी की घोषणा की जाएगी. सोमवार को हुई बैठक में केंद्रीय अध्यक्ष जयराम महतो के अलावा उपाध्यक्ष देवेंद्र महतो के साथ साथ पार्टी के तमाम बड़े अधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे.
दूसरी तरफ झामुमो ने भी अभी तक प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है. लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि पूर्व मंत्री स्व. रामदास सोरेन के परिवार से ही किसी को उम्मीदवार बनाया जाएगा. इससे पहले कयास लगाये जा रहे थे कि रामदास सोरेन के बड़े बेटे सोमेश सोरेन को यह टिकट दी जाएगी. हालांकि सूत्रों की मानें तो झामुमो अपनी रणनीति बदलकर रामदास सोरेन की पत्नी को भी उम्मीदवार बना सकती है. वहीं, भाजपा की बात करें तो उन्होंने भी प्रत्याशी का ऐलान नहीं किया है. हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी एक बार फिर चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन पर दांव लगा सकती है. नतीजा चाहे जो भी हो इतना तो साफ हो चला है कि जेएलकेएम के चुनावी मैदान में उतरने के साथ ही मुकाबला दिलचस्प हो चला है. बता दें कि 24 अक्टूबर तक प्रत्याशी अपने नामांकन पत्र वापस ले सकते हैं. घाटशीला विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए एक आरक्षित सीट है और इस जानकारी के अनुसार इस उप चुनाव में 2,55,823 मतदाता अपना मत देने वाले हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव से अगर तुलना करें तो इस बार 4,456 से अधिक मतदाताओं का नाम सूची में शामिल किए गये हैं और इस बार वो भी मत देंगे. ST रिजर्व इस सीट पर आदिवासी मतदाता लगभग 49 प्रतिशत हैं. आदिवासी मतदाताओं में 90 प्रतिशत मतदाता संथाल हैं. जबकि शेष भूमिज, मुंडा, हो, माहली और आदिम जनजाति के आदिवासी वोटर हैं. जबकि 6 प्रतिशत वोटर अल्पसंख्यक हैं. अल्पसंख्यक वोटरों में सबसे ज्यादा 90 प्रतिशत मुस्लिम हैं. एससी वोटर भी लगभग 5 प्रतिशत हैं. शेष 40 प्रतिशत वोटर ओबीसी और सामान्य वर्ग के हैं. इस विधानसभा सीट पर हमेशा आदिवासी वोटर ही जीत और हार का कारण बनते हैं.
इस सीट पर कांग्रेस से लगातार तीन बार विधायक रह चुके डॉ प्रदीप बलमुचू का भी व्यक्तिगत वोट झामुमो और बीजेपी के लिए जीत हार तय करता है. वर्ष 2009 में रामदास सोरेन ने चुनाव हारने के बाद भी वर्ष 2014 और 2019 का विधानसभा चुनाव लड़े थे जिसमे 2014 में वो हार गए थे और उनकी जगह बीजेपी के लक्ष्मण तुडु जीते थे। रामदास का व्यक्तिगत वोट लगभग 38 हजार माना जाता है. वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस का झामुमो से पहली दफा गठबंधन हुआ और उसके कारण झामुमो के प्रत्याशी दिवंगत शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन को 98 हजार मत मिला था. जो अब तक का सबसे अधिक मत भी था. लेकिन इस बार समीकरण कुछ और ही है। कांग्रेस नाराज हैं, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद इन एक वर्षों में कांग्रेस को झामुमो ने हमेशा हाशिए पर रखा. बलमुचू ने भी बगावती तेवर दिखाया, लेकिन अब वे शांत हैं. लेकिन उनके समर्थकों में झामुमो के प्रति नाराजगी है. जिस कारण प्रदीप कुमार बलमुचू का हिन्दू वोट भाजपा की ओर शिफ्ट हो सकते हैं. ऐसे में झामुमो के लिए इस बार चुनाव जंग आसान नहीं होगा. तो अब देखना होगा कि इस बार घाटशीला विधानसभा उपचुनाव में क्या होता है, फिलहाल इसपर और जो updates आते रहेंगे वो हम आपको बताते रहेंगे। आपको हमारी ये जानकारी कैसी लगी कमेन्ट सेक्शन में बताए और देखते रहें एयरनाउ।


