देश : अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी के भारत दौरे के दौरान नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को शामिल नहीं होने कि अनुमति दी गई। इस घटना से मीडिया जगत में नाराजगी और विवाद खड़ा हो गया है।

पी. चिदंबरम ने दी प्रतिक्रिया
इस घटना पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, अगर महिला पत्रकारों को प्रेस कॉन्फ्रेंस से बाहर रखा गया, तो पुरुष पत्रकारों को विरोध स्वरूप प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़ देनी चाहिए थी। चिदंबरम का कहना है कि इस तरह की घट नाएं लोकतांत्रिक मूल्यों और लैंगिक समानता के खिलाफ हैं।
सोशल मीडिया पर बढ़ी बहस
इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस छिड़ गई है। कई पत्रकारों और नागरिकों ने महिला पत्रकारों के साथ हुए भेदभाव की निंदा की है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि भारत को मेज़बान देश के रूप में इस तरह की घटनाओं को रोकने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
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महिला पत्रकारों ने जताई नाराजगी
महिला पत्रकारों ने इसे लैंगिक भेदभाव बताया और प्रेस स्वतंत्रता के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में किसी प्रेस इवेंट में महिला पत्रकारों को बाहर रखना शर्मनाक है।
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पी. चिदंबरम के बयान पर मिलीजुली प्रतिक्रिया
जहां एक ओर कई लोग चिदंबरम की बात का समर्थन कर रहे हैं, वहीं कुछ का कहना है कि पुरुष पत्रकारों के बाहर जाने से संवादहीनता बढ़ती। हालांकि, बहुसंख्यक लोगों का मत है कि इस तरह के विरोध से ही भविष्य में ऐसे भेदभावपूर्ण फैसलों पर रोक लगाई जा सकती है।


