शुक्रवार का दिन और जुमे की नमाज़ के बाद बड़ा बवाल हो गया। वजह बनी एक लाइन “आई लव मोहम्मद।” इस स्लोगन को लेकर इतना हंगामा मचा कि पुलिस को एक्शन मोड में आना पड़ा। इत्तेहादे मिल्लत काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा समेत करीब 50 लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। छह मुकदमे दर्ज हुए। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी इस पर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने मंच से साफ कहा कि मौलाना भूल गया कि शासन किसका है। वो मानते थे कि धमकी देंगे, सड़क पर भीड़ उतार देंगे और जबरदस्ती जाम कर देंगे। लेकिन हमने तय किया कि जाम नहीं होगा, कर्फ्यू नहीं लगेगा और ऐसा सबक सिखाया जाएगा कि आने वाली पीढ़ियां दंगा करना भूल जाएंगी।
बरेली में पत्थरबाज़ी और बवाल
शुक्रवार की नमाज़ के बाद बरेली की सड़कों पर तौकीर रजा की अपील पर भीड़ इकट्ठा हो गई। पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो पथराव शुरू हो गया। उसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया, लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर पकड़ा और हालात काबू में किए। वहीं, इस घटना के बाद सूबे की राजनीति भी गरमा गई। लखनऊ की सड़कों पर रातों-रात नए होर्डिंग लगवा दिए गए। इन पर लिखा था “आई लव श्री योगी आदित्यनाथ जी” और “आई लव बुलडोजर।” यानी एक तरह से ‘आई लव मोहम्मद’ के जवाब में ‘आई लव योगी’ और ‘आई लव बुलडोजर’ का नारा दिया गया।
बाराबंकी में भी देर रात इसी विवाद ने नया मोड़ ले लिया। यहां “आई लव मोहम्मद” लिखे पोस्टर फाड़ दिए गए। इसके बाद माहौल गर्माया और भीड़ जुट गई। हालांकि पुलिस ने बड़ी संख्या में पहुंचकर हालात पर काबू पा लिया। अब जरा पीछे चलते हैं। पूरा विवाद असल में शुरू हुआ कानपुर से। तारीख थी 4 सितंबर। मौके पर था बारावफात का जुलूस, यानी ईद मिलाद-उन्नबी। इसी दौरान एक ग्रुप ने जुलूस के रास्ते पर ‘आई लव मोहम्मद’ लिखा एक बैनर और लाइटबोर्ड लगा दिया। जैसे ही ये सामने आया, स्थानीय हिंदू संगठनों ने इसका विरोध कर दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बैनर हटवा दिए और नौ लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की। साथ ही 15 अज्ञात लोगों पर भी एफआईआर लिखी गई।
कानपुर से शुरू हुआ विवाद
कानपुर से शुरू हुआ यह विवाद धीरे-धीरे आसपास के शहरों और फिर अन्य राज्यों तक फैल गया। जगह-जगह ‘आई लव मोहम्मद’ लिखे बैनर और पोस्टर लगाए जाने लगे। इसके समर्थन में रैलियां भी निकाली गईं। माहौल इतना गर्म हुआ कि हिंदू समुदाय की ओर से इसका जवाब देने की रणनीति बनाई गई। उन्होंने भी अपने-अपने इलाकों में “आई लव महादेव” और “आई लव महाकाल” जैसे बैनर लगा दिए। यानी एक लाइन ने धर्म के दो समुदायों के बीच नई खाई खींच दी। जहां एक तरफ मुस्लिम संगठन ‘आई लव मोहम्मद’ को आस्था और पैगंबर से मोहब्बत बताने लगे, वहीं हिंदू संगठन इसे सियासी साजिश करार देकर विरोध करने लगे। इस बीच प्रशासन की मुश्किलें भी बढ़ गईं। क्योंकि मामला सिर्फ एक पोस्टर या स्लोगन का नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रदेश में कानून-व्यवस्था की चुनौती बन गया।
योगी सरकार का कड़ा संदेश
योगी सरकार इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बेहद सख्त नजर आई। सीएम खुद बयान देकर चेतावनी दे चुके हैं। पुलिस लगातार गिरफ्तारी कर रही है और मुकदमे दर्ज कर रही है। वहीं, विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने में लगा है। लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि कानपुर से शुरू हुआ यह विवाद अब यूपी के कई जिलों में फैल चुका है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या “आई लव मोहम्मद” और उसके जवाब में “आई लव महादेव” जैसे पोस्टर अब राजनीति और धर्म की जंग का नया चेहरा बनने वाले हैं। क्या यह विवाद आने वाले चुनावी मौसम में एक बड़ा मुद्दा बनेगा। और सबसे अहम बात कि आम लोग इस तनातनी में कितने सुरक्षित हैं। क्योंकि शुरुआत चाहे किसी नारे से हुई हो, लेकिन अंत हमेशा सड़क पर टकराव और पुलिसिया लाठीचार्ज में हो रहा है।


