Lifestyle Desk: जिस पानी को हम रोज पीते हैं, उसे देखकर यह पता लगाना आसान नहीं होता कि वह कितना सुरक्षित है. साफ दिखने वाले पानी में भी कुछ ऐसे केमिकल हो सकते हैं, जो लंबे समय तक शरीर में जाने पर सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं. अब Drinking Water Safety को लेकर चिंता बढ़ गई है.
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85 हेल्थ और पर्यावरण से जुड़े ग्रुप्स ने पानी में नाइट्रेट की मात्रा तय करने वाले पुराने नियमों को फिर से देखने की मांग की है. इनका कहना है कि पानी में नाइट्रेट की सीमा तय करने वाले नियम काफी पुराने हो चुके हैं. आज के समय में सेहत से जुड़ी नई जानकारी को देखते हुए इन नियमों में बदलाव की जरूरत है.
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Drinking Water Safety को लेकर बढ़ी चिंता
पीने के पानी में नाइट्रेट की मात्रा को लेकर नियम 1958 में बनाए गए थे. उस समय पानी में नाइट्रेट की सीमा 50 मिलीग्राम प्रति लीटर तय की गई थी. उस समय यह सीमा बच्चों में होने वाली ब्लू बेबी सिंड्रोम की समस्या को ध्यान में रखकर तय की गई थी. इसमें शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे बच्चे की हालत गंभीर हो सकती है. लेकिन अब एक्सपर्ट्स का कहना है कि पानी की सुरक्षा के लिए सिर्फ इसी एक समस्या को ध्यान में रखना काफी नहीं है. नई रिसर्च में नाइट्रेट के लंबे समय तक शरीर पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई जा रही है.
ऐसे पहुंचता है पानी में नाइट्रेट
नाइट्रेट एक ऐसा केमिकल है जो खेतों में इस्तेमाल होने वाली खाद और दूसरे कारणों से जमीन के रास्ते पानी में पहुंच सकता है. खासकर उन जगहों पर जहां खेती ज्यादा होती है, वहां जमीन के नीचे मौजूद पानी में नाइट्रेट बढ़ने का खतरा रहता है. Drinking Water Safety के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि नाइट्रेट पानी में मिल जाता है और इसे सिर्फ देखकर पता नहीं लगाया जा सकता. पानी देखने में साफ हो सकता है, लेकिन उसमें कुछ ऐसी चीजें मिल सकती हैं जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं.
सेहत पर नाइट्रेट का असर
Drinking Water Safety के लिए लोग पानी को लेकर सावधानी रखें
अगर किसी इलाके में खेती ज्यादा होती है या लोग जमीन के नीचे से मिलने वाले पानी का इस्तेमाल करते हैं, तो समय-समय पर पानी की जांच कराना अच्छा हो सकता है. इसके अलावा, पानी से जुड़ी किसी भी जानकारी या शिकायत के लिए सरकारी रिपोर्ट और स्थानीय जानकारी पर नजर रखनी चाहिए. फिलहाल पानी में नाइट्रेट की मात्रा को लेकर पुराने नियमों में बदलाव की मांग हो रही है. अगर आने वाले समय में नए नियम बनाए जाते हैं, तो इससे लोगों को ज्यादा सुरक्षित पानी मिल सकेगा और सेहत से जुड़ी परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है.

