पलामू: पलामू टाइगर रिजर्व में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम की शुरुआत झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति एवं विरासत को प्रदर्शित करने वाले पारंपरिक लोक नृत्य से हुई। कार्यक्रम में मनिका विधायक रामचंद्र सिंह भी मौजूद रहे। इस मौके पर पलामू टाइगर रिजर्व के उप निदेशक प्रजेश जेन की प्रस्तुति के माध्यम से “जन-वन भागीदारी” की अवधारणा के अंतर्गत प्रशासन द्वारा किए जा रहे सतत जनजातीय विकास एवं आजीविका संवर्धन के प्रयासों को प्रस्तुत किया गया।
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“हुनर से रोजगार”
कार्यक्रम में “हुनर से रोजगार” उन्नत कौशल विकास कार्यक्रम की उपलब्धियों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। इस पहल के तहत अब तक 600 से अधिक जनजातीय युवाओं को नेचुरलिस्ट, कंप्यूटर, ड्राइविंग, इलेक्ट्रिशियन, सिलाई सहित विभिन्न रोजगारपरक कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को उनके क्षेत्र में ही कौशल एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना तथा रोजगार के लिए होने वाले पलायन को कम करना है।
“मिशन अविरल धारा”
“मिशन अविरल धारा” के माध्यम से वैज्ञानिक रिज-टू-वैली (Ridge to Valley) दृष्टिकोण अपनाते हुए स्थानीय नदियों एवं जलधाराओं के पुनर्जीवन की दिशा में कार्य किया जा रहा है। यह पहल जल संकट और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में हरित रोजगार (Green Jobs) के अवसर सृजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती
कार्यक्रम में “महुआ मित्र” पहल के माध्यम से खाद्य-ग्रेड महुआ संग्रहण एवं बेहतर मूल्य प्राप्त कर स्थानीय समुदायों और किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी दी गई। वहीं “ऑपरेशन ब्लैक गोल्ड” के तहत वन क्षेत्र से प्राप्त पत्ती-कचरे को उच्च गुणवत्ता वाले जैविक कम्पोस्ट में परिवर्तित कर वन प्रबंधन की एक चुनौती को आजीविका एवं आर्थिक अवसर में बदला जा रहा है।
वन उत्पादों से नई आर्थिक पहचान
पलामू के स्थानीय एवं वन आधारित उत्पादों को आजीविका से जोड़ने की दिशा में “हेनार हनी”, “कोयल कोल्ड प्रेस्ड मस्टर्ड ऑयल”, “जूही धूप” और “वनम हैंडमेड हर्बल सोप” जैसे उत्पाद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन पहलों के माध्यम से स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक कौशल का समन्वय करते हुए समुदायों के लिए प्रकृति आधारित टिकाऊ रोजगार के अवसर विकसित किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों में आत्मविश्वास एवं स्वावलंबन बढ़ने के साथ युवाओं के पलायन को रोकने की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है।
इको-टूरिज्म में बढ़ेगी भागीदारी
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रोफेशनल इको-गाइड कोर्स पूरा करने वाले जनजातीय युवाओं को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। प्रशिक्षित युवा अब पलामू टाइगर रिजर्व के इको-टूरिज्म परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। पलामू का इको-टूरिज्म क्षेत्र नेतरहाट से बेटला और मंडल तक विस्तृत है, जिसमें लोध जलप्रपात, सुग्गा जलप्रपात जैसे प्राकृतिक स्थलों के साथ-साथ ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर पलामू किला भी शामिल है।
ये प्रशिक्षित स्थानीय युवा पर्यटकों को क्षेत्र की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं जनजातीय विरासत से परिचित कराने के साथ-साथ संरक्षण और स्थानीय आजीविका के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करेंगे। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जनजातीय समुदायों की भागीदारी के बिना प्रकृति संरक्षण को स्थायी रूप से सफल नहीं बनाया जा सकता। स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान, कौशल, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों को अवसरों से जोड़कर पलामू में संरक्षण के साथ समावेशी एवं टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास जारी है।


