रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर मचे घमासान और सीआईडी (CID) जांच की आंच के बीच आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। एक ओर जहां विपक्ष और अभ्यर्थी पूरी प्रक्रिया की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सीआईडी ने पूर्व अध्यक्ष को 28 जुलाई को पूछताछ के लिए तलब किया है। पूछताछ से ठीक पहले एल. ख्यांगते ने मीडिया से बातचीत कर परीक्षा संचालन, गोपनीय प्रक्रियाओं, बाहरी एजेंसी के चयन और आयोग की कार्यप्रणाली पर विस्तृत स्पष्टीकरण दिया है।
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आमतौर पर मीडिया से बात करने से परहेज करनेवाले खियांग्ते ने पहली बार इस्तीफे पर अपनी बात मीडिया के समक्ष रखी। खियांग्ते ने कहा कि जेपीएससी में सीआइडी की जांच शुरू होते हुए उन्हें लगा कि अध्यक्ष की कुर्सी पर रहते हुए उनपर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती। इस कारण उन्होंने सबसे पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
‘निष्पक्ष जांच से सामने आए सच, दोषियों पर हो कार्रवाई’- ख्यांगते
परीक्षा कराने वाली आउटसोर्स एजेंसी विवाद और सीआईडी कार्रवाई पर पूर्व अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि आयोग हमेशा निष्पक्ष और पारदर्शी एजेंसियों का ही चयन करता है।
“एजेंसी चयन के समय यदि कोई मिसिंग लिंक रहा हो या वह बाद में ब्लैकलिस्ट हुई हो, तो इसकी जानकारी मेरे संज्ञान में नहीं थी। यदि परीक्षा संचालन में एजेंसी या किसी पदाधिकारी के स्तर पर कोई गड़बड़ी हुई है, तो निष्पक्ष जांच के जरिए सच सामने आना चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।” – एल. ख्यांगते, पूर्व अध्यक्ष (JPSC)
गोपनीयता और स्ट्रॉन्ग रूम प्रक्रिया पर दिया जवाब
उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा और परिणामों में हेरफेर के आरोपों का जवाब देते हुए ख्यांगते ने कहा कि आयोग का स्ट्रॉन्ग रूम और मूल्यांकन तंत्र पूरी तरह गोपनीय होता है। परीक्षा समाप्ति के बाद उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित जमा करने से लेकर मूल्यांकन तक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत हर स्तर पर जिम्मेदारियां तय होती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य परीक्षा के परिणाम तैयार करने या मूल्यांकन प्रक्रिया में नियमों से परे जाकर अध्यक्ष की कोई सीधी व्यक्तिगत भूमिका नहीं होती।
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सदस्यों के हस्ताक्षर के बिना कई परीक्षाओं के परिणाम जारी होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जेपीएससी की वर्ष 2002 की नियमावली में यह प्रविधान है कि स्क्रीनिंग परीक्षाओं के परिणाम जारी करने में सदस्यों का अनुमोदन अनिवार्य नहीं होगा। अंतिम मेधा सूची तैयार करने में ही सभी सदस्यों का अनुमोदन अनिवार्य है।
14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा की वायरल ओएमआर शीट पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में परीक्षा से संबंधित एजेंसी ही बता सकती है। ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को परीक्षा का काम देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कोई नहीं चाहता कि किसी ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को काम दिया जाए। एजेंसी की क्षमता को देखते हुए उसका चयन किया जाता है।
चुनौतियों भरा रहा कार्यकाल और रिफॉर्म्स की कोशिश
मार्च 2025 में पदभार संभालने का जिक्र करते हुए पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि उस समय आयोग में लंबे समय से लंबित मामले और प्रोन्नति की फाइलें अटकी पड़ी थीं। उन्होंने जनवरी-फरवरी तक कई पेंडिंग बैकलॉग मुकदमों और शिक्षकों के प्रमोशन से जुड़े मामलों का निष्पादन किया। आयोग में प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक सुधार उनकी पहली प्राथमिकता थी।
विपक्ष द्वारा 6 महीने पहले शिकायतें मिलने के बावजूद कार्रवाई न करने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि आयोग में प्रतिदिन ई-मेल और डाक के माध्यम से दर्जनों पत्र आते हैं। आयोग का ध्यान हमेशा शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से परीक्षा संपन्न कराने पर रहता है।
अध्यक्ष की शक्तियों के इस्तेमाल पर उन्होंने कहा कि जेपीएससी के सभी महत्वपूर्ण निर्णय बोर्ड और संवैधानिक सदस्यों के साथ मिलकर नियमानुसार ही लिए जाते हैं। आयोग के भीतर की गोपनीय चर्चाओं को उसी दायरे में रखा जाता है।
झारखंड में 14वीं जेपीएससी परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद से ही ओएमआर शीट में गड़बड़ी, कट-ऑफ मार्क्स न जारी करने और एजेंसी की सत्यनिष्ठा को लेकर लगातार प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी जारी है। ऐसे में सीआईडी की आगामी पूछताछ को इस पूरे प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
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