रांची : राज्यसभा सांसद और झारखंड भाजपा के महामंत्री डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि जिन दलों की सरकारों के कार्यकाल में लगातार प्रश्नपत्र लीक हुए, परीक्षाएँ रद्द हुईं और लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ, वही दल आज पेपर लीक के नाम पर नैतिकता का ढोंग कर रहे हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की सरकारें युवाओं को पारदर्शी भर्ती व्यवस्था देने में पूरी तरह विफल रही हैं।
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प्रदीप कुमार वर्मा ने कहा कि कांग्रेस व सहयोगी दलों की सरकारों के कार्यकाल में परीक्षा माफिया, दलालों और भ्रष्ट तंत्र को संरक्षण मिलने के आरोप लगातार सामने आते रहे, लेकिन जिम्मेदार सरकारों ने अपनी प्रशासनिक विफलताओं को स्वीकार करने की बजाय राजनीतिक बयानबाजी और लीपापोती का रास्ता अपनाया।
10 राज्यों में 13 पेपर लीक
डॉ. वर्मा ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों के अनुसार वर्ष 2018 से 2026 के बीच कांग्रेस, उसके सहयोगी दलों तथा अन्य गैर-एनडीए सरकारों के कार्यकाल में कम-से-कम 10 राज्यों में 13 प्रमुख प्रश्नपत्र लीक एवं गंभीर परीक्षा-अनियमितता के मामले सामने आए। इन मामलों में अनेक परीक्षाएँ रद्द करनी पड़ीं, पुनर्परीक्षाएँ आयोजित हुईं और लाखों विद्यार्थियों तथा बेरोजगार युवाओं को मानसिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक नुकसान उठाना पड़ा।
झारखंड में परीक्षा व्यवस्था अविश्वसनीय
उन्होंने कहा कि झारखंड की झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन सरकार के कार्यकाल में परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह अविश्वसनीय बन चुकी है। 28 जनवरी 2024 को आयोजित जेएसएससी सीजीएल परीक्षा की तीसरी पाली का सामान्य ज्ञान प्रश्नपत्र लीक होने के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इसके बाद फरवरी 2025 में जैक की कक्षा दसवीं की हिंदी और विज्ञान परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले सामने आए तथा दोनों परीक्षाएँ रद्द करनी पड़ीं। यह स्थिति घोर प्रशासनिक विफलता और परीक्षा माफिया के सामने सरकार के आत्मसमर्पण को उजागर करती है।
कर्नाटक में एसएसएलसी में पेपर लीक
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ भी परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित रखने में सरकार पूरी तरह असफल रही। मार्च 2025 में एसएसएलसी तैयारी परीक्षा के विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ऑनलाइन प्रसारित हुए। जनवरी 2026 में द्वितीय पीयूसी तैयारी परीक्षा के अंग्रेजी एवं गणित सहित कई प्रश्नपत्र लीक होने के मामले सामने आए। इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व देश को परीक्षा की सुचिता पर उपदेश देने का प्रयास कर रहा है।
हिमाचल में 12वीं परीक्षा के पेपर लीक
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मार्च 2025 में कक्षा बारहवीं की अंग्रेजी परीक्षा का प्रश्नपत्र-पैकेट समय से पहले खोला गया, जिसके बाद पूरे राज्य की परीक्षा रद्द करनी पड़ी। यह केवल एक परीक्षा की गड़बड़ी नहीं, बल्कि राज्य सरकार की निगरानी व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने का प्रमाण है।
डॉ. वर्मा ने कहा कि राजस्थान की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के शासनकाल में पेपर लीक एक संगठित संकट के रूप में सामने आया। वर्ष 2021 की राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा—रीट का लेवल-दो प्रश्नपत्र लीक हुआ तथा दिसंबर 2022 में वरिष्ठ अध्यापक ग्रेड-दो भर्ती परीक्षा का सामान्य ज्ञान प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बाहर आ गया। इन घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस सरकार युवाओं की मेहनत, समय और भविष्य की रक्षा करने में विफल रही।
उन्होंने कहा कि पंजाब की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय मार्च 2018 में कक्षा बारहवीं की गणित परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ, जिसके कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी। महाराष्ट्र की तत्कालीन महाविकास आघाड़ी सरकार, जिसमें कांग्रेस भी सहभागी थी, के कार्यकाल में वर्ष 2021 की स्वास्थ्य विभाग भर्ती परीक्षा के 100 में से 92 प्रश्न और उनके उत्तर परीक्षा से पहले प्रसारित होने का गंभीर मामला सामने आया।
इसी प्रकार केरल की माकपा-नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार के कार्यकाल में दिसंबर 2024 की क्रिसमस मॉडल परीक्षा के कक्षा दसवीं अंग्रेजी और कक्षा ग्यारहवीं गणित के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ऑनलाइन प्रसारित हुए। यह वामपंथी सरकार के उस खोखले दावे की पोल खोलता है, जिसमें वह स्वयं को शिक्षा और सुशासन का आदर्श बताती है।
डॉ. वर्मा ने कहा कि बिहार की तत्कालीन महागठबंधन सरकार के समय अक्टूबर 2023 की पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा, ओडिशा की तत्कालीन बीजू जनता दल सरकार के समय जुलाई 2023 की जूनियर इंजीनियर सिविल मुख्य परीक्षा तथा तेलंगाना की तत्कालीन भारत राष्ट्र समिति सरकार के समय मार्च 2023 की सहायक अभियंता भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के बाद परीक्षाएँ रद्द करनी पड़ीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों का वास्तविक उद्देश्य युवाओं को न्याय दिलाना नहीं, बल्कि पेपर लीक जैसे संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिक दोहन करना है। अपने शासन वाले राज्यों में लगातार हो रहे पेपर लीक पर मौन रहने वाले दल केंद्र सरकार और एनडीए शासित राज्यों पर चयनात्मक आरोप लगाकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं।
डॉ. वर्मा ने कहा कि कांग्रेस पहले झारखंड, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और महाराष्ट्र में अपने शासनकाल का हिसाब दे। कांग्रेस नेतृत्व को बताना चाहिए कि इन राज्यों में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा क्यों सुनिश्चित नहीं की गई, दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कितनी कार्रवाई हुई, परीक्षा माफिया की संपत्ति कितनी जब्त की गई और प्रभावित अभ्यर्थियों को क्या क्षतिपूर्ति दी गई।
उन्होंने कहा कि पेपर लीक केवल प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ किया गया संगठित अपराध है। जो सरकार परीक्षा की गोपनीयता तक सुरक्षित नहीं रख सकती, उसे युवाओं के भविष्य और रोजगार पर बड़ी-बड़ी बातें करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
डॉ. वर्मा ने मांग किया कि प्रत्येक पेपर लीक मामले की समयबद्ध और निष्पक्ष जाँच हो, दोषी अधिकारियों, प्रश्नपत्र तैयार करने वाली एजेंसियों, परीक्षा माफिया, दलालों और लाभार्थियों की पहचान कर उनकी संपत्ति जब्त की जाए तथा प्रभावित अभ्यर्थियों को आर्थिक क्षतिपूर्ति दी जाए। साथ ही राज्यों की परीक्षा एजेंसियों की स्वतंत्र सुरक्षा एवं तकनीकी ऑडिट कराई जाए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष को राजनीतिक नाटक बंद कर देश के युवाओं से अपनी विफलताओं के लिए सार्वजनिक रूप से क्षमा माँगनी चाहिए।


