रांची : झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा, “Gen Z भविष्य है, और भविष्य तकनीक का है — तो फिर पेपर लीक क्यों?” लेकिन यह पोस्ट छात्रों के गुस्से का केंद्र बन गई। पोस्ट के कुछ ही मिनटों में बड़ी संख्या में छात्रों ने मंत्री के कमेंट बॉक्स में सवालों की झड़ी लगा दी। सबसे बड़ा सवाल था—”जब झारखंड में JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियां और पेपर लीक के आरोप लगे, तब आपकी आवाज कहां थी?”
“दूसरों के पेपर लीक पर चिंता, अपने राज्य पर चुप्पी क्यों?”
Highlights:
इसे भी पढ़ें: कॉकरोच जनता पार्टी की सरकार से तीसरी दौर की बातचीत आज, कहा- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा नहीं हुआ तो क्या करेंगे
छात्रों की प्रतिक्रिया
छात्रों ने मंत्री के पोस्ट को साझा करते हुए लिखा कि यदि पेपर लीक युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, तो झारखंड के लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य क्या कम महत्वपूर्ण है? उन्होंने पूछा कि राज्य में भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों पर सरकार के मंत्री खुलकर क्यों नहीं बोलते। एक छात्र ने लिखा, “Gen Z केवल दूसरे राज्यों में नहीं रहता, झारखंड का युवा भी Gen Z है। यहां की मेहनत, सपने और भविष्य की कीमत कौन समझेगा?”
‘डिजिटल आंदोलन’ का मंच
मंत्री की पोस्ट पर लगातार आती प्रतिक्रियाओं ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी। अनेक छात्रों ने JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, लंबित नियुक्तियों और पारदर्शिता के मुद्दे उठाए। कई लोगों ने लिखा कि यदि सरकार वास्तव में युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है, तो सबसे पहले राज्य की भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाना चाहिए।
“झारखंड में भी Gen Z आंदोलन”
कई छात्रों ने चेतावनी देते हुए लिखा कि यदि युवाओं की आवाज अनसुनी की गई तो “झारखंड में भी Gen Z आंदोलन” खड़ा होगा। उनका कहना था कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के विश्वास, करियर और भविष्य का सवाल है।
स्वास्थ्य मंत्री की पोस्ट के बाद एक बार फिर JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद चर्चा के केंद्र में आ गए। छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं होगी, सीबीआई जांच नहीं होगी तब तक युवाओं का भरोसा बहाल नहीं हो पाएगा।


