नई दिल्ली: पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने यानी E20 को लेकर मची बहस के बीच केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची। सरकार ने साफ कहा कि अभी ये एक प्रयोग है और पुरानी गाड़ियों को नुकसान होने के कोई पक्के सबूत नहीं मिले हैं।
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सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने क्या कहा?
मंगलवार को सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कोर्ट को बताया कि सरकार अभी 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण का ट्रायल कर रही है। उन्होंने कहा, “हमें इसके नतीजे अगले साल तक मिल जाएंगे।” सरकार का दावा है कि E20 से गाड़ियों में मैकेनिकल डैमेज होता है, इसका कोई ठोस डेटा मौजूद नहीं है। सरकार ने तर्क दिया कि ये पॉलिसी देश की एनर्जी सिक्योरिटी, किसानों की कमाई और पर्यावरण के लिए फायदेमंद है।
BPCL की याचिका पर हुई सुनवाई
ये मामला भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन BPCL की एक याचिका से जुड़ा है। BPCL ने कर्नाटक हाईकोर्ट के 23 जून के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने BPCL, HPCL और IOC को कहा था कि वो एक डिस्टिलरी के एथेनॉल सप्लाई बढ़ाने के आवेदन पर फैसला करें। BPCL का कहना है कि इस आदेश से सरकार के E20 टारगेट पर असर पड़ सकता है।
कोर्ट ने पूछा – हाईकोर्ट क्यों नहीं गए?
सुप्रीम कोर्ट ने BPCL से सवाल किया कि आप सीधे यहां क्यों आए, डिवीजन बेंच क्यों नहीं गए? इस पर AG ने कहा कि एथेनॉल के कॉन्ट्रैक्ट अक्टूबर 2025 में फाइनल हो चुके हैं और कई हाईकोर्ट में ऐसी ही याचिकाएं लंबित हैं। “इससे राष्ट्रीय नीति प्रभावित होगी।”
उन्होंने समय की कमी बताते हुए ट्रांसफर पिटीशन की मांग की ताकि अक्टूबर में होने वाले कॉन्ट्रैक्ट रिन्यूअल से पहले मामला निपट जाए।
2030 का नया टारगेट क्या है?
भारत ने अपना 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य 5 साल पहले ही हासिल कर लिया था। 1 अप्रैल से देशभर में E20 पेट्रोल की सप्लाई शुरू हो चुकी है।
अब सरकार ने अगला लक्ष्य रखा है: 2030 तक पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 30% तक पहुंचाना।




