न्यूज डेस्क: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी सियासी संकट के बीच मंगलवार को CID की टीम ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पहुंची। इसी परिसर में TMC का केंद्रीय कार्यालय भी स्थित है। जांच एजेंसी फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच के सिलसिले में वहां पहुंची थी। रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में जांच टीम को परिसर के अंदर जाने से रोक दिया गया, लेकिन बाद में अतिरिक्त पुलिस बल की मौजूदगी में अधिकारियों को अंदर प्रवेश मिला।
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महिला पुलिसकर्मी भी रही मौजूद
CID टीम के साथ कालीघाट थाने की पुलिस और महिला पुलिसकर्मी भी मौजूद थीं। अधिकारियों ने सुरक्षा कर्मियों से बातचीत के बाद परिसर के अंदर जाकर दस्तावेजों की जांच शुरू की। सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम ने पार्टी कार्यालय में मौजूद रिकॉर्ड और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
यह पूरा मामला TMC के बागी विधायकों द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़ा है। बागी विधायकों ने विधानसभा स्पीकर को पत्र भेजकर दावा किया था कि अभिषेक बनर्जी के लेटर हेड पर भेजे गए प्रस्ताव में फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। इस प्रस्ताव में शोभनदेव को नेता विपक्ष बनाए जाने की बात कही गई थी। आरोप है कि हस्ताक्षर नकली थे और इन्हें लेकर ही CID जांच कर रही है।
अभिषेक ने मांगा था जांच के लिए समय
CID अधिकारियों के अनुसार, अभिषेक बनर्जी ने एजेंसी को बताया था कि संबंधित विधायकों के हस्ताक्षर 30बी हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित TMC के केंद्रीय कार्यालय में जुटाए गए थे। इसी आधार पर जांच टीम वहां पहुंची। इससे पहले सोमवार को CID की टीम अभिषेक बनर्जी के घर भी पहुंची थी। सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक ने एजेंसी के सामने पेश होने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। उन्होंने कहा था कि वह पहले से तय राजनीतिक कार्यक्रमों में व्यस्त हैं, जिनमें I.N.D.I.A. गठबंधन की बैठक भी शामिल थी। CID ने उन्हें मंगलवार शाम 5 बजे तक पेश होने का निर्देश दिया था।
TMC के पूर्व सांसद सुभाषिश चक्रवर्ती ने कहा कि अभिषेक बनर्जी की गैरमौजूदगी में पार्टी ने तलाशी की अनुमति नहीं दी थी। उन्होंने कहा कि अभिषेक के आने के बाद एजेंसी जांच कर सकती है।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला
इस बीच, ममता बनर्जी ने पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को TMC विधायक दल का नेता मानने और उन्हें नेता विपक्ष की मान्यता देने के स्पीकर के फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले पर 10 जून को हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम से पश्चिम बंगाल की राजनीति में तनाव और बढ़ सकता है।



