न्यूज डेस्क : कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा है कि सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत और आख़िर में ‘वंदे मातरम के सभी छंदों को गाना वहां मौजूद लोगों के लिए ग़ैर-ज़रूरी’ है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, कांग्रेस नेता शशि थरूर ने केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में एक दिन पहले वंदे मातरम विवाद पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने वंदे मातरम से जुड़े विवाद को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताते हुए उम्मीद जताई कि इसका समाधान आपसी सहमति से हो जाएगा.
Highlights:
शशि थरूर ने कहा, “मैं समझ सकता हूं कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या प्रधानमंत्री से जुड़े औपचारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम को एक बार गाया जाए. लेकिन किसी छोटे कार्यक्रम में पूरा गीत दो बार गाना समझ से परे है. मुझे इसका कोई औचित्य नहीं दिखता, और यह ख़ास तौर पर प्रभावी भी नहीं है.”
इसे भी पढ़ें : तमिलनाडु में बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई ने छोड़ी पार्टी, नई पार्टी का जल्द करेंगे एलान
बीजेपी की कड़ी प्रतिक्रिया
पूर्व केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर बीजेपी की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है. बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने पीटीआई से कहा है, “कांग्रेस पार्टी को वंदे मातरम से समस्या है, क्योंकि वह मुस्लिम लीग के प्रभाव में आ गई है.”
उन्होंने कहा, “गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देश स्पष्ट रूप से कहते हैं कि वंदे मातरम गाना वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य है. इस मुद्दे पर विवाद खड़ा करके राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी ने साफ़ कर दिया है कि उसकी नीतियां और मंशा देशभक्ति से नहीं, बल्कि देश के विरोध से प्रेरित हैं.”
गृह मंत्रालय ने किया है जरूरी
बता दें कि गृह मंत्रालय के मुताबिक, वंदे मातरम के आधिकारिक संस्करण को गाने की पूरी अवधि 3 मिनट, 10 सेकंड है. इसे सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों या अन्य औपचारिक आयोजनों में बजाया जाना अनिवार्य है. इस दौरान हर व्यक्ति का खड़ा होना अनिवार्य होगा. अब तक राष्ट्रगीत के पहले दो अंतरे गाए जाते थे.


