Wednesday, June 3, 2026

वेदांता ग्रुप के मुंबई-दिल्ली स्थित ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, फेमा नियमों के उल्लंघन का आरोप

न्यूज डेस्क : अनिल अग्रवाल के वेदांता ग्रुप के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को छापेमारी की है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, यह छापेमारी ‘विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम’ (एफ़ईएमए) से जुड़े एक मामले में की गई है, जिसके तहत ईडी ने तलाशी अभियान चलाया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई ग्रुप के मुंबई और दिल्ली स्थित दफ्तरों पर की गई। इधर ईडी की इस अचानक कार्रवाई का असर शेयर बाजार में कंपनी के स्टॉक पर भी देखने को मिला। दोपहर करीब 11:45 बजे वेदांता लिमिटेड का शेयर 0.7% की गिरावट के साथ ₹334.6 पर ट्रेड कर रहा था।

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FEMA नियमों का उल्लंघन

ED की कार्रवाई फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़ी हुई है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब कंपनी अपने कारोबार को 5 अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में बांटने (डिमर्जर) की प्रक्रिया पर काम कर रही है। बताया जा रहा है कि ईडी की इस कार्रवाई का मुख्य कनेक्शन रॉयल्टी पेमेंट से जुड़ा है। जांच एजेंसी उस रॉयल्टी भुगतान की जांच कर रही है जो भारतीय कंपनी ‘वेदांता लिमिटेड’ की तरफ से अपनी मूल यानी पैरेंट कंपनी ‘वेदांता रिसोर्सेज’ को किया गया था।

कर्ज में डूबी है वेदांता रिसोर्सेज

बताया जा रहा है कि वेदांता रिसोर्सेज ब्रिटेन (UK) में स्थित एक एंटिटी है, जो इस समय भारी कर्ज से जूझ रही है। रिपोर्टों के अनुसार, वेदांता रिसोर्सेज पर करीब ₹74,000 करोड़ का कुल कर्ज है। इस कर्ज को चुकाने और फंड मैनेज करने के लिए भारतीय यूनिट अक्सर अपनी विदेशी पैरेंट कंपनी को मोटी रॉयल्टी देती रही है, जिसे लेकर अब जांच एजेंसी ने शिकंजा कसा है।

जांच में पूरा सहयोग 

केंद्रीय जांच एजेंसी की छापेमारी के बीच वेदांता ग्रुप के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा, “हम जांच अधिकारियों को पूरा सहयोग दे रहे हैं और उनके द्वारा मांगी जा रही सभी जानकारियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। वेदांता सभी लागू कानूनों और नियमों के पालन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मामला अभी रेगुलेटरी प्रोसेस के अधीन है, इसलिए हम इस स्टेज पर इससे ज्यादा कुछ भी कहने और करने में असमर्थ हैं।”

5 हिस्सों में बंटने जा रही कंपनी

बता दें कि वेदांता लिमिटेड भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड एक बड़ी कंपनी है, जिसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन (मार्केट कैप) लगभग ₹1.3 लाख करोड़ है। इन दिनों कंपनी का डिमर्जर प्रोसेस आखिरी चरणों में है। मई महीने में ही कंपनी को इस डिमर्जर के लिए विभिन्न जरूरी रेगुलेटरी मंजूरियां मिली थीं। इस योजना के तहत मौजूदा बिजनेस को 5 अलग-अलग वर्टिकल्स में स्प्लिट किया जा रहा है, जिससे बाजार में 4 नई लिस्टेड कंपनियां ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होंगी।

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