Wednesday, July 22, 2026

यूपी में बिजली संकट पर सख्त हुए सीएम योगी, बोले- लापरवाही हुई तो तय होगा एक्शन

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में बढ़ती बिजली मांग और बिजली संकट को लेकर रविवार को ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन और सभी डिस्कॉम अधिकारियों के साथ विद्युत आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा बैठक की। इस दौरान ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि बिजली सप्लाई में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर किसी स्तर पर चूक हुई तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई तय होगी।

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कंट्रोल रूम का निरीक्षण करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने ऊर्जा मंत्री और राज्य मंत्री को फील्ड में उतरकर कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन कॉल सेंटर का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गांव से लेकर शहर तक निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए। सीएम ने कहा कि अगर किसी क्षेत्र में बिजली सप्लाई बाधित होती है तो उपभोक्ताओं को समय पर और सही जानकारी दी जाए। सिर्फ शिकायत दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को यह भी बताया जाए कि समस्या कब तक ठीक होगी।

उपभोक्ता सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बिजली बिल समय पर और सही तरीके से उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए। बिलिंग और वसूली व्यवस्था को और पारदर्शी तथा बेहतर बनाया जाए। उन्होंने कहा कि बिजली सिर्फ तकनीकी विषय नहीं है, बल्कि आम लोगों की जिंदगी, किसानों की सिंचाई, व्यापार और उद्योग से सीधे जुड़ी हुई सेवा है। इसलिए शिकायतों का त्वरित समाधान और फील्ड अधिकारियों की नियमित निगरानी जरूरी है।

आंधी-तूफान में भी त्वरित रिस्पॉन्स जरूरी

सीएम योगी ने कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने, फीडर बाधित होने और शिकायत निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिया कि आंधी-तूफान और भीषण गर्मी जैसी परिस्थितियों में भी फील्ड स्तर पर त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रखा जाए। जहां अंडरग्राउंड केबल बिछी हैं, वहां खुदाई से पहले संबंधित अधिकारियों से अनुमति लेना अनिवार्य हो।

स्मार्ट मीटर व्यवस्था को आसान बनाने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लोगों के लिए अधिक आसान और लाभकारी बनाने पर जोर दिया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाए। अधिकारियों ने बैठक में बताया कि प्रदेश में अब तक 89.23 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। सरकार के निर्देश पर सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर को फिर से पोस्टपेड सिस्टम में बदला गया है। जून 2026 से स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को हर महीने 1 से 10 तारीख के बीच बिल भेजा जाएगा। बिल एसएमएस, व्हाट्सऐप और ई-मेल के जरिए भी उपलब्ध कराया जाएगा।

बिजली मांग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इस साल अप्रैल और मई में पिछले वर्ष की तुलना में अधिक गर्मी पड़ने से बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है। 15 अप्रैल से 22 मई के बीच प्रदेश में औसत दैनिक बिजली खपत 501 मिलियन यूनिट से बढ़कर 561 मिलियन यूनिट पहुंच गई। वहीं अधिकतम बिजली मांग 29,831 मेगावाट से बढ़कर 30,339 मेगावाट हो गई। अधिकारियों के अनुसार 20, 21 और 22 मई को उत्तर प्रदेश देश में दूसरा सबसे ज्यादा बिजली खपत करने वाला राज्य रहा।

अधिकारियों ने बताया कि 15 मई के बाद कुछ पावर प्लांटों में तकनीकी कारणों से बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ था। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने 12 राज्यों के साथ पावर बैंकिंग कर बिजली आपूर्ति बनाए रखी। वर्ष 2015 से 2026 के बीच प्रदेश ने 32,305 मेगावाट बिजली क्षमता के लिए समझौते किए हैं, जिनमें 62 प्रतिशत क्षमता पिछले तीन वर्षों में जोड़ी गई है।

ट्रांसफॉर्मर खराब होने के मामलों में कमी

बैठक में यह भी बताया गया कि पिछले कुछ वर्षों में ट्रांसफॉर्मर खराब होने की घटनाओं में काफी कमी आई है। वर्ष 2022-23 में जहां 429 पावर ट्रांसफॉर्मर खराब हुए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर 87 रह गई है। इसी तरह 100 केवीए से अधिक क्षमता वाले वितरण ट्रांसफॉर्मरों के खराब होने के मामलों में भी गिरावट दर्ज की गई है। 2022-23 में 39,177 बड़े ट्रांसफॉर्मर खराब हुए थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या घटकर 20,292 रह गई। अधिकारियों ने बताया कि बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, समय पर मरम्मत और जवाबदेही तय होने से यह सुधार संभव हो पाया है।

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