रांची: झारखंड में लगातार बिगड़ती बिजली व्यवस्था को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में अनियमित बिजली आपूर्ति, लो-वोल्टेज, बार-बार ट्रांसफॉर्मर खराब होने और उपभोक्ता सेवाओं में गिरावट से जनता काफी परेशान है। एक तरफ राज्य भीषण गर्मी की चपेट में है, वहीं दूसरी ओर बिजली संकट ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि घंटों बिजली कटौती के कारण आम जनजीवन, पढ़ाई, खेती, व्यापार और उद्योग प्रभावित हो रहे हैं।
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अपनी सरकार के कामों का किया जिक्र
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में वर्ष 2014 से 2019 के बीच भाजपा सरकार के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उस समय झारखंड को पावर हब बनाने के लक्ष्य के साथ कई बड़ी परियोजनाएं शुरू की गई थीं। रघुवर दास ने कहा कि वर्ष 2014 में केवल 38 लाख घरों तक बिजली पहुंची थी, जबकि उनकी सरकार ने 68 लाख परिवारों तक बिजली पहुंचाने का काम किया। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार के दौरान 4027 किलोमीटर नई ट्रांसमिशन लाइन और करीब 1 लाख 41 हजार 976 किलोमीटर लंबी वितरण लाइन बिछाई गई थी। साथ ही 132 केवी और 220 केवी नेटवर्क का विस्तार भी किया गया।
ग्रिड और सब-स्टेशन का हुआ था विस्तार
पत्र में कहा गया कि ग्रामीण और शहरी इलाकों में बिजली व्यवस्था मजबूत करने के लिए कई नए ग्रिड सब-स्टेशन और पावर सब-स्टेशन बनाए गए थे। शहरी क्षेत्रों में R-APDRP योजना के तहत अंडरग्राउंड केबलिंग, नए ट्रांसफॉर्मर और वितरण प्रणाली को मजबूत करने का काम भी किया गया था। इसके अलावा बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 600 से अधिक लाइनमैन की नियुक्ति प्रक्रिया भी शुरू की गई थी।
पतरातू और नॉर्थ कर्णपुरा परियोजना
रघुवर दास ने अपने पत्र में पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड परियोजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पतरातू थर्मल पावर स्टेशन के पुनरुद्धार के लिए NTPC लिमिटेड के साथ संयुक्त उद्यम बनाकर लगभग 4000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि झारखंड को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और रोजगार पैदा करना भी था।
रघुवर दास ने दावा किया कि 800 मेगावाट उत्पादन का लक्ष्य वर्ष 2022 तक रखा गया था, लेकिन सरकार बदलने के बाद परियोजना समय पर पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि इस साल मार्च में यहां से 800 मेगावाट बिजली उत्पादन शुरू हुआ है और जल्द दूसरी यूनिट से भी उत्पादन शुरू होगा।
सरकार से की ये मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री से ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राज्य में निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही खराब ट्रांसफॉर्मरों को जल्द बदलने, लो-वोल्टेज और बार-बार बिजली कटौती की समस्या दूर करने तथा ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क के रखरखाव को प्राथमिकता देने की मांग की गई है। उन्होंने उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रणाली को भी अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया।
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