LPG गैस से राहत, होमुर्ज से 45 हजार टन गैस लाने की तैयारी; कच्चे तेल की कीमत बढ़ेंगी

न्यूज डेस्क: ईरान युद्ध और होर्मुज बंद होने के कारण देश में एलपीजी गैस की किल्लत से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है. वहीं सरकार ने बीते दिनों 5 किलों गैस सिलेंडर की कीमतों में 261 रुपए और कमर्शियल गैस सिलेंडर में 1 हजार रुपए की बढ़ोतरी की है. आमजन को आशंका है कि जल्द ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी उछाल आएगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस बीच राहत की बात है कि भारत क सुपरटैंकर लगभग 45 हजार टन एलपीजी गैस के साथ होर्मुज को पास कर रहा है. हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सुपरटैंकर होर्मुज को पार किया है या नहीं.

भारत के 14 जहाज फारस की खाड़ी में फंसे

जानकारी के अनुसार, सर्व शक्ति टैंकर समुद्री रास्ते से उत्तर की ओर बढ़ रहा है. शनिवार को यह लारक और केसम आइलैंड के पास था. वहीं शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह सुपरटैंकर ओमान की खाड़ी से होकर भारत पहुंचेगा. 13 अप्रैल से अमेरिका में नाकेबंदी जारी है. अमेरिका और होर्मुज बंद होने के कारण उस रास्ते से टैंकर निकलने में परेशानी हो रही है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस नाकेबंदी के कारण भारत के 14 जहाज फारस की खाड़ी में ही रुके हुए है. वहीं 2 जहाजों ने होर्मुज से निकलने का प्रयास भी किया, लेकिन ईरान ने उसे चेतावनी देकर वापस लौटा दिया. इसके साथ ही टैंकर समुद्र के वैकल्पिक रास्ते से भी निकल रहे है. ईरान के कनेक्शन वाले लगभग 34 टैंकर अमेरिका नाकेबंदी को चकमा देकर निकल चुके है.

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समुद्री सीमा में एक वैकल्पिक रास्ता

नियमों के अनुसार, अमेरिका की नौसेना किसी भी देश के जहाजों को समुद्री सीमा में नहीं रोक सकती है. कोई भी जहाज ईरान के तटीय क्षेत्र से होकर चाबहार बंदरगाह पहुंचता है फिर दक्षिण होकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के रास्ते निकलना एक वैकल्पिक रास्ता है. जहां से महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, कर्नाटक या फिर केरल पोर्ट पर पहुंचा जा सकता है. वहीं दूसरा रास्ता पाकिस्तान की समुद्री सीमा से होकर गुजरता है जिसमें काफी खतरा रहता है.

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल आएगा. सरकारी ने भविष्य में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने की संभावना से इनकार नहीं किया है. वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेलों की कीमत 4 साल के उच्च स्तर पर बढ़कर 126 डॉलर तक पहुंच गया है. हालांकि इसमें हल्की गिरावट हुई है, लेकिन फिर भी कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है.

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