न्यूज डेस्क: आम आदमी पार्टी आंतरिक टूट से फिलहाल उबरती नजर नहीं आ रही है। पिछले सप्ताह सात राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद अब गुजरात में पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष और चर्चित किसान नेता सागर रबारी ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। सागर रबारी गुजरात में किसानों की आवाज उठाने वाले प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। अपने इस्तीफे को लेकर उन्होंने कोई कारण नहीं बताया है.
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हालांकि उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब पार्टी अगले साल होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा आगामी नगर निकाय चुनावों को देखते हुए भी माना जा रहा है कि यह इस्तीफा पार्टी के लिए बड़ा नुकसान दायक साबित हो सकता है।
किसानों के मुद्दों को लेकर रहे सक्रिय
उन्होंने कई बार जमीन अधिग्रहण, किसानों के अधिकार और कृषि से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन किए हैं। ग्रामीण इलाकों और किसान समुदाय में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। इसी वजह से आम आदमी पार्टी उन्हें राज्य में किसान चेहरे के रूप में आगे बढ़ा रही थी।
सूत्रों के मुताबिक, सागर रबारी पिछले कुछ समय से पार्टी के अंदरूनी कामकाज और किसानों से जुड़े मुद्दों पर पार्टी की रणनीति से नाराज चल रहे थे। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी के राज्य अध्यक्ष को भेज दिया है। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस्तीफे के पीछे की विस्तृत वजहों पर अभी कोई बड़ा बयान नहीं दिया है।
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2021 में हुए थे AAP में शामिल
सागर रबारी साल 2021 में आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे। पार्टी ने उन्हें राज्य उपाध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्होंने 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के लिए सक्रिय भूमिका निभाई थी। किसान समुदाय में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत चेहरा बनाया था। सागर रबारी पहले खेदूत अधिकार मंच के प्रमुख भी रह चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके पार्टी छोड़ने से खासकर उत्तरी गुजरात और सौराष्ट्र क्षेत्र में AAP की ग्रामीण पकड़ कमजोर हो सकती है।
आगामी चुनावों पर पड़ सकता है असर
गुजरात में आने वाले नगर निकाय चुनावों से पहले यह इस्तीफा पार्टी के लिए चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि किसान वोट बैंक पर इसका असर पड़ सकता है। ऐसे समय में जब पार्टी राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है, एक बड़े किसान नेता का जाना संगठन के लिए चुनौती बन सकता है।


