रांची: देश में पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इसी कड़ी में झारखंड में भी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। राज्य में गुरुवार से एन्यूमेरेटर (गणनाकर्मी) और सुपरवाइजर (पर्यवेक्षक) के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रशासन का लक्ष्य है कि जनगणना का काम आधुनिक तकनीक के जरिए तेज और पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए।
Highlights:
1 मई से 15 मई तक होगी स्व-गणना
जनगणना के पहले चरण में 1 मई से 15 मई तक स्व-गणना यानी सेल्फ एन्यूमरेशन की प्रक्रिया चलेगी। इस दौरान लोग खुद अपनी जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज कर सकेंगे। सरकार की ओर से यह व्यवस्था इसलिए शुरू की गई है ताकि लोग आसानी से अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकें और जनगणना प्रक्रिया को अधिक सटीक बनाया जा सके। स्व-गणना के बाद दूसरा चरण 16 मई से शुरू होगा। इस चरण में 14 जून तक मकान सूचीकरण यानी हाउस लिस्टिंग का कार्य किया जाएगा। इस दौरान गणनाकर्मी घर-घर जाकर मकानों से जुड़ी जानकारी एकत्र करेंगे। इसमें घरों की स्थिति, परिवारों की संख्या और अन्य जरूरी विवरण दर्ज किए जाएंगे।
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डिजिटल तकनीक से आसान होगी प्रक्रिया
इस बार जनगणना में डिजिटल तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इससे आंकड़ों को एकत्र करने और सुरक्षित रखने में आसानी होगी। साथ ही डेटा में गलती की संभावना भी कम होगी। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल जनगणना से आंकड़ों का विश्लेषण तेजी से किया जा सकेगा, जिससे सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी। जनगणना कार्य को सफल बनाने के लिए गणनाकर्मियों और पर्यवेक्षकों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उन्हें डिजिटल उपकरणों और डेटा संग्रह की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जाएगी ताकि काम बिना किसी परेशानी के पूरा हो सके।
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प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे जनगणना प्रक्रिया में सहयोग करें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं। अधिकारियों का कहना है कि जनगणना के आंकड़े भविष्य की योजनाओं और नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डिजिटल जनगणना को देश में प्रशासनिक व्यवस्था और तकनीकी विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


