Thursday, August 6, 2026

लैंड फॉर जॉब मामले में सुप्रीम कोर्ट से लालू यादव को मिला झटका, मामला रद्द करने की याचिका खारिज

नई दिल्ली : ‘लैंड फॉर जॉब’ केस में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से राजद सुप्रीमो व बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका लगा, जब सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव की इस मामले में सीबीआई की ओर दायर एफआईआर को रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया. जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने लालू यादव व उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दर्ज एफआईआर व निचली अदालतों में चल रही संबंधित कार्यवाही को रद्द करने संबंधी याचिका खारिज कर दी.

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व्यक्तिगत पेशी से मिली छूट

इस मामले में हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव को ट्रायल के दौरान व्यक्तिगत रूप से ट्रायल कोर्ट में पेश होने की जरूरत नहीं होगी. दिल्ली हाई कोर्ट के मार्च 2026 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया. इस फैसले से लालू यादव और उनके परिवार पर मुकदमे की कार्यवाही जारी रहेगी. लैंड फॉर जॉब घोटाला लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुए पश्चिम मध्य रेलवे (जबलपुर) में ग्रुप-डी भर्ती से जुड़ा है.

सीबीआई के अनुसार, उम्मीदवारों के परिवारों से जमीन खरीदकर या हस्तांतरित करवाकर बदले में नौकरियां दी गईं. मई 2022 में दर्ज एफआईआर में लालू, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और अन्य परिवारजनों समेत कई आरोपियों का नाम है. तीन चार्जशीट (2022, 2023 और 2024) दाखिल हो चुकी हैं. केस में कुल 34 से ज्यादा आरोपी हैं और कई संपत्तियों को जब्त भी किया जा चुका है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज की थी याचिका 

मार्च 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस रविंदर डुडेजा ने लालू यादव की याचिका खारिज कर दी थी. लालू ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 17-A का हवाला देते हुए दावा किया था कि बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के जांच शुरू नहीं हो सकती. हाई कोर्ट ने याचिका को ‘devoid of merit’ बताते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया अपराध बनता है, इसलिए एफआईआर और चार्जशीट रद्द करने का कोई आधार नहीं है.

हाईकोर्ट का फैसला बरकरार 

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. बेंच ने कहा कि मामले में गंभीर आरोप हैं और ट्रायल को बिना रुकावट आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए. हालांकि, स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लालू यादव को व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी गई. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल पेशी तक सीमित है, मुकदमे की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की गई.

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