रांची: झारखंड में डॉक्टरों की नियुक्ति, प्रमोशन और सेवा शर्तों को लेकर झारखंड स्वास्थ्य सेवा संघ (झासा) ने आंदोलन का ऐलान किया है. रविवार को झासा की हुई बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि अगर सरकार ने संघ की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो 5 अक्टूबर से चरणबद्ध आंदोलन शुरू होगा. इसके बाद भी यदि मांगें पूरी नहीं हुई तो 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार और अनिश्चितकालीन धरना शुरू होगा.
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इन मांगों को लेकर आंदोलन
झासा के सचिव डॉ. मृत्युंजय ठाकुर ने बताया कि बैठक में संविदा के आधार पर डॉक्टरों की नियुक्ति, डायनेमिक एसीपी और JPSC के माध्यम से रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति शामिल है. उन्होंने कहा कि पिछले महीने संविदा आधारित चिकित्सा नियुक्ति को लेकर नियमावली तैयार की गई है, जिसका संघ विरोध कर रहा है. झासा का कहना है कि राज्य में डॉक्टरों के खाली पदों को JPSC के माध्यम से नियमित नियुक्ति से भरा जाना चाहिए. लगातार संविदा के आधार पर नियुक्तियां करना स्थायी समाधान नहीं है. संघ की मांग है कि राज्य के योग्य MBBS और विशेषज्ञ डॉक्टरों को नियमित नियुक्ति का अवसर दिया जाए.
डॉक्टरों को मिले डायनेमिक ACP
डॉ. मृत्युंजय ठाकुर ने कहा कि डॉक्टरों को केंद्र और बिहार की तर्ज पर डायनेमिक ACP का लाभ मिलना चाहिए. इसके तहत सेवा अवधि के आधार पर डॉक्टरों को समयबद्ध करियर प्रोग्रेशन और वित्तीय उन्नयन का लाभ मिलता है. संघ ने बिहार और केंद्र की व्यवस्था का हवाला देते हुए झारखंड में भी डॉक्टरों के लिए प्रभावी करियर प्रोग्रेशन लागू करने की मांग की. झासा सचिव ने कहा कि अगर सरकार ने मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की तो 5 अक्टूबर से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा.
22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की चेतावनी
डॉ. बिमलेश सिंह ने कहा कि राज्य में वर्ष 2015 से स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से काम लिया जा रहा है, लेकिन अब तक उनके लिए स्पष्ट नियमावली नहीं बनाई गई है. उन्होंने कहा कि राज्य में उपलब्ध MBBS डॉक्टरों की नियमित नियुक्ति करने के बजाय दूसरे राज्यों से डॉक्टरों को लाने की बात की जा रही है. जबकि झारखंड की भौगोलिक व प्रशासनिक परिस्थितियां अलग हैं. ऐसे में दूसरे राज्यों से डॉक्टरों को लाने को लेकर सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 22 अक्टूबर से राज्यभर के डॉक्टर कार्य बहिष्कार कर सकते हैं.
डॉक्टर छोड़ रहे नौकरी
डॉ. अजीत कुमार ने स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी होने वाले नोटिफिकेशन और डॉक्टरों की सेवा शर्तों को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कई बार डॉक्टरों की नियुक्ति के बाद ऐसी परिस्थितियां बनती हैं, जिससे उन्हें नौकरी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ता है. उन्होंने कहा कि उनके साथ सदर अस्पताल में ज्वाइन करने वाले कुछ डॉक्टर बाद में नौकरी छोड़कर बिहार चले गए. उनके मुताबिक बिहार में डॉक्टरों को समय पर प्रमोशन मिलने की वजह से वहां सेवा करना उनके लिए अधिक सुविधाजनक है.
बिहार में क्या है Dynamic ACP की व्यवस्था?
बिहार हेल्थ सर्विस रूल्स, 2013 के Rule 25 के तहत डॉक्टरों के लिए वित्तीय प्रगति और करियर प्रोग्रेशन से जुड़ा प्रावधान है. इसके तहत निर्धारित सेवा अवधि पूरी करने के बाद वित्तीय उन्नयन का लाभ दिया जाता है. सामान्य तौर पर यह व्यवस्था 6, 12 और 18 वर्ष की सेवा अवधि से जुड़ी बताई जाती है. नियमों के तहत इसमें Departmental Promotion Committee की सिफारिश, सेवा रिकॉर्ड और विजिलेंस क्लियरेंस जैसे मानदंड भी महत्वपूर्ण होते हैं.


