पटना: बिहार की राजधानी पटना में पुलिस ने एक बड़े ड्रग्स नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में स्कैम, कच्चा माल, हथियार और नकदी बरामद की है। इस कार्रवाई से शहर में सक्रिय संगठित तस्करी गिरोह का खुलासा हुआ है, जिसमें एक पुलिसकर्मी की संलिप्तता भी सामने आई है।
Highlights:
भारी मात्रा में स्मैक और कच्चा माल बरामद
पटना पुलिस ने शुक्रवार देर रात कार्रवाई करते हुए 1.661 किलोग्राम तैयार स्मैक और 19.5 किलोग्राम कच्चा माल जब्त किया। इस कच्चे माल को पावर, कट पत्थर और पाउडर के रूप में जाना जाता है, जिससे करीब 38 किलोग्राम स्मैक तैयार किया जाना था। तैयार होने के बाद इसे शहर के विभिन्न इलाकों में सप्लाई किया जाना था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान एक पिस्टल, एक कट्टा, दो मैग्जीन, इलेक्ट्रॉनिक तराजू, 2.15 लाख रुपये नकद, 12 मोबाइल, सात बैंक चेक, सात पासबुक और नशीली दवाएं भी बरामद कीं। इतनी बड़ी मात्रा में सामान मिलने से साफ है कि गिरोह संगठित तरीके से काम कर रहा था।
पुलिसकर्मी का नाम आने से हड़कंप
बरामद 19 लाख रुपये के दो चेक एक पुलिसकर्मी ऋषिकेश कुमार के नाम पर पाए गए। जांच में पता चला कि वह मूल रूप से नालंदा का निवासी है और फिलहाल फरार है। उसकी भूमिका को लेकर पुलिस छानबीन कर रही है और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। अन्य पुलिसकर्मियों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। इस मामले में समस्तीपुर के जितेंद्र कुमार और जहानाबाद के नितीश कुमार को गिरफ्तार किया गया है। जितेंद्र पहले भी स्मैक तस्करी के मामले में गिरफ्तार हो चुका है और 35 महीने जेल में रह चुका है।
आलमगंज और खेमनीचक से हुआ खुलासा
पुलिस को सूचना मिलने के बाद आलमगंज स्थित एक फ्लैट में छापेमारी की गई, जहां से दोनों आरोपियों को पकड़ा गया। पूछताछ में उन्होंने बताया कि स्मैक की सप्लाई रामकृष्णानगर के खेमनीचक स्थित किराए के मकान से हो रही थी। वहां छापेमारी में बड़ी मात्रा में कच्चा माल और उपकरण बरामद हुए। जांच में सामने आया है कि खेमनीचक में स्मैक तैयार कर ऑटो या छोटे वाहनों के जरिए आलमगंज भेजा जाता था। वहां से इसे छोटे-छोटे पैकेट में बांटकर शहर के अलग-अलग इलाकों जैसे पटना सिटी, कमला नेहरू नगर, चीना कोठी और खगौल में सप्लाई किया जाता था।
कोड भाषा और नए लड़कों का इस्तेमाल
तस्करी के इस नेटवर्क में मोबाइल पर कोड भाषा का इस्तेमाल किया जाता था। डिलीवरी के लिए नए लड़कों को लगाया जाता था, ताकि पहचान छिपी रहे। इन लड़कों को कमीशन या वेतन दिया जाता था। पुलिस के अनुसार इस नेटवर्क में डेढ़ दर्जन से ज्यादा अपराधियों की संलिप्तता हो सकती है। 12 लोगों की पहचान भी सामने आई है, जो सिलीगुड़ी से ट्रेन के जरिए ड्रग्स मंगाते थे। इस गिरोह का मास्टरमाइंड बिट्टू नाम का युवक बताया जा रहा है, जो फिलहाल फरार है।
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एसएसपी का बयान और आगे की कार्रवाई
पटना के एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा ने बताया कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और सभी आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी खेप से स्पष्ट है कि यह एक बड़ा संगठित नेटवर्क है, जिसे पूरी तरह खत्म करने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है।

