दिल्ली: संसद के बजट सत्र की शुरुआत से पहले सरकार ने आज सभी राजनीतिक दलों के साथ सर्वदलीय बैठक आयोजित की। इस बैठक का उद्देश्य बजट सत्र को सुचारू और सकारात्मक ढंग से चलाने के लिए विधायी एजेंडे और प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करना था। बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ने अपनी-अपनी बातें रखीं और कई राष्ट्रीय व क्षेत्रीय मुद्दों को उठाया। रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई इस सर्वदलीय बैठक में 35 से अधिक राजनीतिक दलों के सांसद शामिल हुए। सरकार की ओर से बैठक में यह अपील की गई कि संसद का बजट सत्र बिना बाधा के चले और देश से जुड़े अहम विषयों पर सार्थक चर्चा हो। बैठक में सभी दलों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया।
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28 जनवरी से शुरू होगा बजट सत्र
सरकार ने जानकारी दी कि संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होगा। इस दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी। इसके बाद 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा। खास बात यह है कि 1 फरवरी को रविवार है, लेकिन इसके बावजूद बजट पेश किया जाएगा। ऑल पार्टी मीटिंग के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरकार राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद ही अपना विधायी एजेंडा साझा करती है, यही संसदीय परंपरा है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को अपनी बात कहने की पूरी आजादी है, लेकिन संसद को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक-दूसरे की बात सुनना भी जरूरी है। उन्होंने मनरेगा की जगह प्रस्तावित VB-G RAM-G कानून पर तत्काल चर्चा की मांग को खारिज कर दिया।
विपक्ष ने उठाए बेरोजगारी, प्रदूषण और महंगाई जैसे मुद्दे
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि सभी दलों ने अपने-अपने राज्यों से जुड़े मुद्दे बैठक में रखे। उन्होंने बताया कि प्रदूषण, मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR), बढ़ती बेरोजगारी और अन्य सामाजिक-आर्थिक समस्याओं पर चर्चा की मांग की गई है। समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने बजट को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस बार का बजट आम जनता को कोई राहत देने वाला नहीं है। उनके अनुसार, बजट का फायदा सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलेगा जिनके पास पहले से संपत्ति और संसाधन हैं।
AAP ने विदेश नीति और वोटर लिस्ट पर सवाल उठाए
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने बैठक में सरकार की विदेश नीति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार हों या अमेरिका द्वारा भारत के प्रधानमंत्री को लेकर कथित तौर पर अपमानजनक रवैया, इन मुद्दों पर सरकार की चुप्पी चिंता का विषय है। इसके अलावा उन्होंने प्रयागराज में शंकराचार्य से जुड़े विवाद का मुद्दा उठाया। संजय सिंह ने SIR के नाम पर वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने का भी सवाल उठाया और पारदर्शिता की मांग की।
अन्य अहम मांगें भी सामने आईं
बैठक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर संसद में चर्चा कराने की मांग उठी। ओडिशा में संकट में फंसे किसानों और भाजपा शासित राज्यों में बिगड़ती कानून व्यवस्था का मुद्दा भी विपक्षी दलों ने जोर-शोर से रखा। इसके साथ ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े कानून लाने की मांग भी बैठक में सामने आई।


