रांची: झारखंड के प्रतिष्ठित मानसिक स्वास्थ्य संस्थान रिनपास (RINPAS) की प्रभारी निदेशक डॉ. जयती सिमलाई एक बार फिर कानूनी शिकंजे में हैं। रांची की एक अदालत ने उनके विरुद्ध लापरवाही से गाड़ी चलाने और एक महिला मरीज की मौत का कारण बनने के मामले में मुकदमा चलाने का आदेश जारी किया है।
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मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को रांची की न्यायिक दंडाधिकारी सुश्री ऋत्विका सिंह की अदालत ने इस मामले पर अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने डॉ. सिमलाई के खिलाफ आईपीसी की धारा 279 (तेजी और लापरवाही से वाहन चलाना) और धारा 304A (लापरवाही से मौत का कारण बनना) के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 2 मार्च 2022 की है। आरोप है कि रिनपास परिसर के भीतर ही डॉ. जयती सिमलाई अपनी कार को बेहद तेजी और लापरवाही से चला रही थीं। इसी दौरान वहां इलाजरत एक महिला मरीज, तैरु निशा, उनकी कार की चपेट में आ गई और गंभीर रूप से घायल हो गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस घटना को छिपाने के लिए इसे ‘पेड़ से गिरने’ का रूप देने की कोशिश की गई थी। घायल तैरु निशा को रिम्स में भर्ती कराया गया था, जहाँ लंबे उपचार के बाद उनकी मृत्यु हो गई।
पुलिस की ‘क्लीन चिट’ को चुनौती
इस मामले को लेकर समाज सेवी और झामुमो नेता सोनू मुंडा ने कानूनी लड़ाई लड़ी है। इससे पहले पुलिस ने अपनी जांच में साक्ष्यों के अभाव का हवाला देते हुए डॉ. सिमलाई को निर्दोष बताते हुए ‘फाइनल रिपोर्ट’ सौंप दी थी। सोनू मुंडा ने पुलिस की इस रिपोर्ट को चुनौती दी और अधिवक्ता ईशान रोहन के माध्यम से गवाहों के बयान अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। गवाहों की गवाही और दलीलों के आधार पर अदालत ने पुलिस की रिपोर्ट को दरकिनार करते हुए अब मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।
वर्तमान में डॉ. जयती सिमलाई रिनपास की प्रभारी निदेशक के पद पर तैनात हैं। हालांकि, उनकी नियुक्ति पर भी सवाल उठते रहे हैं कि प्राध्यापक नहीं होने के बावजूद उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। अब जब उन पर आपराधिक केस चलेगा, तो सवाल उठ रहे हैं कि क्या वह पद पर बनी रहेंगी? शिकायतकर्ता पक्ष का मानना है कि रिनपास के सर्वोच्च पद पर रहते हुए वह केस के साक्ष्यों को प्रभावित कर सकती हैं।


