रांची: झारखंड की राजधानी रांची के बहुचर्चित अंश और अंशिका अपहरण मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। 12 दिनों तक चले ‘ऑपरेशन मासूम’ के बाद बरामद हुए बच्चों के अपहरणकर्ताओं से पूछताछ में मानव तस्करी के एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस रिमांड पर मौजूद आरोपी दंपत्ति ने स्वीकार किया है कि वे बंगाल और बिहार के बड़े बच्चा चोर गिरोहों के संपर्क में थे।
बंगाल तक फैला है तस्करी का नेटवर्क
धुर्वा पुलिस की पांच दिनों की रिमांड पर पूछताछ के दौरान आरोपी सोनी कुमारी और नव खेरवार उर्फ सूर्य ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आरोपियों ने बताया कि उनका नेटवर्क केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि वे बंगाल के सक्रिय बच्चा चोर गिरोहों के लिए काम करते थे।
वहीं आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे बच्चों को अगवा करने के बाद उन्हें बंगाल या बिहार में ऊंचे दामों पर बेचने की फिराक में थे।
आरोपियों द्वारा बताए गए नामों के आधार पर पुलिस की टीमें बिहार और बंगाल के कई इलाकों में छापेमारी कर रही हैं।
गुलगुलिया बनकर की 5 महीने तक ‘रेकी’
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी दंपत्ति बेहद शातिर हैं। वे पिछले 5 महीनों से धुर्वा स्मार्ट सिटी के पास गुलगुलिया बनकर डेरा जमाए हुए थे। वे दिन भर घूम-घूम कर गुब्बारे बेचते थे, ताकि किसी की नजर उन पर न पड़े। गुब्बारे बेचने के बहाने वे ऐसे बच्चों को चिह्नित करते थे जिन्हें आसानी से बहलाया-फुसलाया जा सके। 2 जनवरी को उन्होंने इसी तरह शालीमार बाजार से अंश और अंशिका को अगवा कर लिया था।
कुछ और बच्चे हुए बरामद
धुर्वा डीएसपी के अनुसार, पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने कुछ अन्य गायब बच्चों को भी बरामद करने में सफलता पाई है। हालांकि, सुरक्षा कारणों से अभी उनकी संख्या और पहचान उजागर नहीं की गई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि सोमवार तक इस मामले में एक ‘मेगा खुलासा’ हो सकता है, जिसमें अंतरराज्यीय गिरोह के कई बड़े चेहरों की गिरफ्तारी की संभावना है। वहीं हटिया डीएसपी ने कहा कि, आरोपियों से पूछताछ जारी है। तस्करी से जुड़े जो भी नए तथ्य सामने आ रहे हैं, उस पर टीमें काम कर रही हैं। हम इस गिरोह की जड़ तक पहुंचेंगे।

