Tuesday, September 15, 2026

हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर गंगा सभा ने की रोक की मांग

हरिद्वार : उत्तराखंड के हरिद्वार में कुंभ क्षेत्र के गंगा घाटों को लेकर एक बार फिर धार्मिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। सभी गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांगों के बीच गंगा सभा ने बुधवार को अपना पक्ष साफ किया है। गंगा सभा ने कहा है कि यह पाबंदी पूरी तरह से नहीं, बल्कि कुछ शर्तों के साथ लागू होनी चाहिए।

कुंभ क्षेत्र में उठी बैन की मांग

हाल के दिनों में कुछ धार्मिक संगठनों और साधु-संतों ने मांग की है कि हरिद्वार के कुंभ क्षेत्र में स्थित सभी गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि कुंभ और गंगा घाट हिंदू आस्था से जुड़े पवित्र स्थल हैं, जहां धार्मिक मर्यादा और परंपराओं का पालन जरूरी है। गंगा सभा ने इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि सभी गैर-हिंदुओं पर पूर्ण प्रतिबंध व्यावहारिक नहीं है। सभा का कहना है कि यदि कोई गैर-हिंदू श्रद्धा और सम्मान के साथ गंगा घाटों पर आता है, तो उसे रोका नहीं जाना चाहिए। हालांकि, गंगा सभा ने यह भी स्पष्ट किया कि घाटों पर ऐसे लोगों के प्रवेश पर सख्ती होनी चाहिए जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं, घाटों की पवित्रता भंग करते हैं या अनुचित गतिविधियों में शामिल पाए जाते हैं।

श्रद्धालुओं की भावनाओं का हवाला

गंगा सभा के पदाधिकारियों का कहना है कि हरिद्वार केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। कुंभ क्षेत्र में आने वाले भक्त स्नान, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान के लिए घाटों पर पहुंचते हैं। ऐसे में किसी भी तरह की अव्यवस्था या अपवित्र आचरण से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो सकती हैं। इस पूरे विवाद के बीच उत्तराखंड प्रशासन की भूमिका को भी अहम माना जा रहा है। गंगा सभा ने कहा है कि घाटों की व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासन की है। यदि नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, तो धार्मिक स्थलों की गरिमा बनी रह सकती है।

पर्यटन और आस्था के बीच संतुलन

हरिद्वार देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का भी बड़ा केंद्र है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि आस्था और पर्यटन के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। पूर्ण प्रतिबंध की बजाय स्पष्ट नियम, पहचान व्यवस्था और आचार संहिता लागू कर विवाद को सुलझाया जा सकता है। हरिद्वार के कुंभ क्षेत्र में गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर चल रही बहस अब एक नए मोड़ पर है। गंगा सभा ने जहां धार्मिक मर्यादा को प्राथमिकता देने की बात कही है, वहीं पूरी तरह से बैन के बजाय सशर्त पाबंदी का समर्थन किया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या फैसला करता है और श्रद्धा व सामाजिक सौहार्द के बीच कैसे संतुलन स्थापित किया जाता है।

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एयर नाऊ स्पेशल

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