उत्तरप्रदेश : संभल में हुई हिंसा के दौरान एक युवक की गोली लगने से मौत के मामले में अदालत का बड़ा फैसला सामने आया है। सीजेएम कोर्ट ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इस फैसले के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा में आ गया है। कोर्ट के इस आदेश पर जियाउर्रहमान बर्क की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने अदालत के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं होता, न वर्दी और न ही किसी का पद। सपा सांसद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर लिखा कि यह फैसला एक साफ संदेश देता है कि चाहे अधिकारी हो या आम नागरिक, कानून तोड़ने वाला बच नहीं सकता।
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क्या है पूरा मामला
यह मामला संभल के नखासा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। यहां रहने वाले यामीन ने 6 फरवरी 2025 को सीजेएम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके बेटे आलम को पुलिस ने गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। यामीन का दावा था कि उनका बेटा घर से दुकान पर सामान लेने निकला था, उसी दौरान उसे गोली लगी। याचिका में यामीन ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत 12 पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया था। मामले की सुनवाई के बाद सीजेएम कोर्ट ने सभी नामजद पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
हिंसा की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 24 नवंबर 2024 को कोर्ट के आदेश पर शाही जामा मस्जिद के सर्वे के लिए एक टीम पहुंची थी। सर्वे के दौरान मस्जिद के सामने बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और देखते ही देखते हालात बिगड़ गए। इसके बाद इलाके में हिंसा भड़क उठी और पथराव शुरू हो गया। इस दौरान चली गोली में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। तभी से इस मामले को लेकर सवाल उठ रहे थे। अब अदालत के आदेश के बाद यह मामला फिर से सुर्खियों में है। जहां एक तरफ सपा सांसद ने कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक हलकों में भी इस आदेश को लेकर हलचल तेज हो गई है। आगे की जांच और कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

