बिहार : बिहार में विधानसभा चुनाव अब अपने आखिरी पायदान पर है. मंगलवार को होने वाले दूसरे चरण के मतदान के लिए चुनाव प्रचार के भोंपू बंद हो चुके हैं. लगभग 40 दिनों तक चले चुनाव प्रचार की गहमागहमी में सभी प्रमुख दलों के स्टार प्रचारकों ने पूरी ताकत झोंक दी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, लालू प्रसाद, तेजस्वी यादव, मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, डी राजा व दीपंकर भट्टाचार्य जैसे बड़े चेहरे प्रचार अभियान में सक्रिय रहे. इस पूरे चुनाव के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कुल 14 सभाओं को संबोधित किया और राजधानी पटना में रोड शो किया तो वहीं जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने उम्मीदवारों के समर्थन में 84 सभाएं कीं. इनमें से 11 सभाएं सड़क मार्ग से और 73 सभाएं हेलीकॉप्टर से कीं.
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने 11, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 24 और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 13 चुनावी जनसभाएं कीं. वहीं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने 186 जनसभाओं को संबोधित किया. केंद्रीय मंत्री सह पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने भी 32 और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने 46 चुनावी सभाओं को संबोधित किया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभाओं के अलावा करीब एक हजार किलोमीटर की सड़क यात्रा भी की. इस दौरान उन्होंने आठ विधानसभा क्षेत्रों में जनसंपर्क कर मतदाताओं से सीधा संवाद स्थापित किया. रास्ते में आने वाले विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में उन्होंने एनडीए प्रत्याशियों से भेंट की, उन्हें माला पहनाकर सम्मानित किया और जनता से उनके समर्थन की अपील की.
बात महागठबंधन की करें तो कांग्रेस के राहुल गांधी चुनाव प्रचार अभियान में एक सप्ताह की देरी से शामिल हुए. 30 अक्टूबर को मुजफ्फरपुर में अपनी पहली जनसभा के बाद से रविवार को चुनाव प्रचार के खत्म होने तक राहुल गांधी ने 16 जनसभाएं की. उन्होंने किशनगंज में अंतिम चुनावी सभा को संबोधित किया. राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस की ओर से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने तीन सभाओं में अपनी उपस्थिति दर्ज करायी. तो वहीं वायनाड सांसद और कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने 13 जनसभाओं को संबोधित किया.
महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और राजद नेता तेजस्वी यादव ने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान 183 जनसभाएं कीं. उन्होंने प्रचार अभियान के दौरान 55 घंटे हेलीकॉप्टर से उड़ान भरी, और एक दिन में अधिकतम 18 सभाएं कीं. तेजस्वी यादव के अलावा वरिष्ठ राजद नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी और प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने भी लगभग 50-50 जनसभाएं कीं. महागठबंधन में शामिल वाम दलों में भाकपा (माले) ने 149, भाकपा ने 113 और माकपा नेताओं ने 78 जनसभाओं को संबोधित किया.
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार नेताओं की जनसभाओं की संख्या जितनी अधिक रही, प्रचार का स्वर भी उतना ही आक्रामक था. सत्तापक्ष ने विकास कार्यों के दम पर वोट मांगा, जबकि विपक्ष ने बदलाव और रोजगार के मुद्दे पर जनता को साधने की कोशिश की. हर पांच साल के बाद नेताओं के होने वाले इस इम्तिहान का रिजल्ट 14 नवंबर को आएगा, जब देश अपने पहले पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू की 136वीं जयंती मना रहा होगा तो वहीं बिहार में 243 विधानसभा सीटों पर खड़े 2616 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला आ रहा होगा.


