संसद का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो गया है। यह सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा और इसमें कुल 15 बैठकें होंगी। पहले ही दिन से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और सरकार तथा विपक्ष कई मुद्दों पर आमने-सामने आ सकते हैं। सत्र के दौरान सरकार 10 नए विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जिनमें केंद्रीय उत्पाद शुल्क संशोधन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण बिल शामिल हैं। वहीं विपक्ष चुनाव आयोग, SIR प्रक्रिया, बढ़ते प्रदूषण, नेशनल हेराल्ड केस, दिल्ली ब्लास्ट और महाभियोग जैसे कई मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाने की रणनीति बना रहा है। इस वजह से सत्र के शुरू होते ही राजनीतिक गर्मी बढ़ना तय माना जा रहा है।
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PM मोदी ने मीडिया को संबोधित किया
सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद परिसर में मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र देश की प्रगति को आगे बढ़ाने का अवसर है। बिहार चुनाव में भारी मतदान को उन्होंने लोकतंत्र की ताकत बताया और कहा कि भारत ने दुनिया को साबित किया है कि लोकतंत्र देश की प्रगति को गति दे सकता है। उन्होंने आशा जताई कि यह सत्र राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
INDIA ब्लॉक की बैठक
सत्र के पहले दिन सुबह 11 बजे लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई। इससे पहले विभिन्न दलों के सांसद संसद परिसर पहुंचते दिखाई दिए। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दफ्तर में INDIA ब्लॉक की बैठक भी चल रही है, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता मौजूद हैं। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य शीतकालीन सत्र में विपक्ष की संयुक्त रणनीति तैयार करना है, ताकि सरकार को हर मुद्दे पर घेरा जा सके।
सत्र के दौरान पेश होंगे 10 महत्वपूर्ण नए बिल
इस सत्र में सरकार दस नए विधेयक पेश करने वाली है, जिनमें एटॉमिक एनर्जी बिल के अलावा वित्त मंत्रालय से जुड़े दो अहम विधेयक भी शामिल हैं। पहले दिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025 और स्वास्थ्य सुरक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सेस विधेयक, 2025 पेश करेंगी। इन विधेयकों का सीधा असर सिगरेट, तंबाकू, पान मसाला और ऐसे उत्पादों पर पड़ेगा, जिन पर फिलहाल जीएसटी क्षतिपूर्ति सेस लगता है। सरकार चाहती है कि सेस अवधि खत्म होने के बाद भी इन उत्पादों पर एक्साइज और सेस लगाकर राजस्व सुनिश्चित रहे। इससे राज्यों और केंद्र दोनों को फायदा होगा।
SIR को लेकर विपक्ष का हंगामा संभव
सात राज्यों में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विपक्ष सरकार पर निशाना साध चुका है और संसद में इस मुद्दे पर हंगामा होने की पूरी संभावना है। विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया में BLO पर इतना दबाव डाला जा रहा है कि कई BLO की मौतें हो चुकी हैं। विपक्ष इस बात पर सरकार से जवाब मांगेगा कि यह प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित क्यों नहीं है। इसके अलावा बिहार विधानसभा चुनाव में NDA की रिकॉर्ड जीत के बाद विपक्ष एक बार फिर चुनाव आयोग और वोटिंग प्रक्रिया में गड़बड़ियों का मुद्दा उठा सकता है। राहुल गांधी लगातार चुनाव आयोग पर सवाल खड़े कर रहे हैं, इसलिए यह विवाद भी सत्र में बड़ी बहस का कारण बन सकता है।
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग
चुनाव आयोग के मुख्य आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष महाभियोग प्रस्ताव लाने की भी तैयारी कर रहा है। अगर ऐसा हुआ तो यह शीतकालीन सत्र के सबसे बड़े राजनीतिक टकरावों में से एक बन सकता है। इसी तरह इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ चल रही महाभियोग प्रक्रिया भी चर्चा में रहेगी। उनके सर्वेंट क्वार्टर से मार्च में जले हुए नोट मिलने के बाद नियुक्त विशेष समिति अपनी रिपोर्ट अब संसद में पेश कर सकती है।
दिल्ली ब्लास्ट, प्रदूषण और नेशनल हेराल्ड केस
सत्र के दौरान दिल्ली में 10 नवंबर को हुए ब्लास्ट का मुद्दा भी उठने वाला है। विपक्ष इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर सरकार पर दबाव बना सकता है। इसके साथ ही दिल्ली में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण स्तर, नए लेबर लॉ, और नेशनल हेराल्ड केस में राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर दर्ज नई FIR भी संसद में चर्चा और हंगामे का कारण बन सकती हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार आर्थिक और सामाजिक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है, वहीं सरकार का दावा है कि विपक्ष बिना कारण हर मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है।
रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी दलों से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सत्र सुचारू रूप से चले और सभी दल अपनी बात सम्मानपूर्वक रख सकें। रिजिजू ने SIR मसले पर कहा कि यह चुनाव आयोग का विषय है और सरकार उसका प्रवक्ता नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विपक्ष बिना गरमागरमी के चर्चा करेगा।
कुल मिलाकर, संसद का यह शीतकालीन सत्र राजनीतिक, आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर मुद्दों से भरा हुआ है। सरकार और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में उतर चुके हैं। आने वाले दिनों में संसद से कई अहम बहसें, टकराव और फैसले सामने आ सकते हैं, जो देश की नीति निर्माण प्रक्रिया को बड़ा दिशा देंगे।


