डेस्क: घर के मंदिर में पूजा-पाठ के दौरान दीपक जलाने की परंपरा काफी पुरानी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दीपक कि रोशनी घर से नकारात्मकता ऊर्जा को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा फैलती है। इसीलिए पूजा करते समय दीपक जलाने के साथ उसकी दिशा का भी खास ध्यान रखना चाहिए।
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वास्तु और धार्मिक मान्यताओं में दीपक रखने की कुछ दिशाओं को काफी शुभ माना जाता है। पूजा घर में दीपक को पूर्व दिशा में जालना काफी शुभ माना जाता है। इसे उगते सूरज का प्रतीक माना जाता है और नई ऊर्जा और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। साथ ही घर का माहौल सकारात्मक वातावरण से भरा रहता है।
इसके अलावा उत्तर दिशा को भी दीपक जलाने जे लिए शुभ दिशा माना जाता है। वास्तु में उत्तर दिशा को धन और दौलत के ईश्वर भगवान कुबेर से संबंधित माना जाता है। इसीलिए कई घरों में पूजा के वक्त दीपक को इस तरह रखा जाता है ताकि दिया का लौ उत्तर दिशा की ओर हो और घर में सुख-समृद्धि बरकरार रहें।
बता दें कि, दक्षिण दिशा को लेकर धार्मिक मान्यताएं थोरी अलग है। क्योंकि दक्षिण दिशा को यमराज यानी मृत्यु के देवता और पितरों की दिशा माना गया है। इस दिशा में रोज दीया रखने से धन हानि, मानसिक तनाव और घर की सुख-शांति में बाधा आ है। हालांकि अलग-अलग परम्पराओं और पूजा विधियों में इसके नियम अलग भी हो सकते है।


