न्यूज डेस्क: यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के स्कूली बच्चों और उनके माता-पिता के नाम पर पत्र लिखा है. उन्होंने इस पत्र में बच्चों के गर्मी छुट्टियों का सदुपयोग करने की सीख दी है, तो वहीं उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को अपनी जड़ों, संस्कारों और प्रकृति से जोड़ने की अपील की है. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि बच्चों को उनके नाना-नानी के घर जरुर लेकर जाए. बच्चों से इन छुट्टियों में प्लास्टिक-मुक्त जीवनशैली अपनाने का संकल्प जरुर ले.
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सीएम योगी ने पत्र में लिखा
सीएम योगी ने पत्र में लिखा “मेरे प्यारे बच्चों, गर्मी की छुट्टियां आप सभी के लिए आनंद, उत्साह और नए शोध का समय लेकर आती हैं. स्कूल की व्यस्त दिनचर्या से थोड़ी राहत मिलते ही मन कुछ नया सीखने, नए स्थान देखने और अपने साथ समय बिताने को उत्सुक हो उठता है. यही अवसर है, जब आप आप उनकी रुचियों को पहचानें, नई आदतें विकसित करें एवं जीवन के ऐसे अनुभव प्राप्त करें, जो आगे चलकर आपके सम्पूर्ण व्यक्तित्व में सहायक हो. किशोर एवं युवा उन छुट्टियों में नई भाषा या कौशल सीख सकते हैं. यह समय अच्छी पुस्तकों से मित्रता, फोटोग्राफी, चित्रकारी, पाक कला, संगीत, बागवानी जैसी रुचियों को पूरा करने का हो सकता है.
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अभिभावकों से आग्रह किया
प्रिय अभिभावकों, कुछ बातें मैं आपसे भी साझा करना चाहता हूं. हममें से अधिकतर लोगों ने बचपन में दादी-दादी, नाना-नानी से कहानियां सुनी होंगी. आज बच्चे इन अनुभवों से दूर होते जा रहे हैं. मेरा आपसे आग्रह है कि इन छुट्टियों में बच्चों को ननिहाल-ददिहाल अवश्य ले जाएं. उन्हें परिवार के साथ समय बिताने दें, ताकि वे अपने संस्कारों और पंरपराओं को निकट से जान सकें.
ग्रीष्मावकाश में आप बच्चों को प्रकृति से जोड़ने का भी प्रयास करें. उनके साथ पौधे लगाएं, उनकी देखभाल का दायित्व उन्हें दें तथा आसपास स्वच्छता बनाए रखने की आदत विकसित करें. जब बच्चे मिट्टी, वृक्ष और जल के महत्व को समझते हैं, तभी उनके अंदर पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित होती है. याद रखिए वृक्ष की जड़ें मजबूत होती हैं, वही सबसे अधिक फलदायी एवं दीर्घजीवी होता है. हमारी संस्कृति और संस्कार भी वैसी ही जड़ें हैं.
गर्मी की छुट्टियों में पौधे लगाएं
सीएम ने बच्चों को प्रकृति और जैव विविधता का अनुभव कराएं. दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, चूका बीच तथा कतर्निया घाट वन्यजीव विहाल जैसे स्थल प्रकृति की अपार सुंदरता से परिचित कराते हैं और यात्रा को चिर-स्मरणीय बना देते हैं. यदि हम इन छुट्टियों में बच्चों को प्रकृति, संस्कृति और स्वास्थ्य से जोड़ पाए तो यह समय उनके जीवन की अमूल्य पूंजी बन जाएगा. इन छुट्टियों में बच्चों से पौधे लगवाएं, उनकी देखभाल का दायित्व सौंपें और आसपास स्वच्छता बनाए रखने की आदत विकसित करें. मिट्टी, वृक्ष और जल के महत्व को समझाते हुए उन्होंने एक बेहद मार्मिक बात लिखी, याद रखिए, जिस वृक्ष की जड़ें मजबूत होती हैं. वही सबसे फलदायी एवं दीर्घजीवी होता है. हमारी संस्कृति और संस्कार भी वैसी जड़ें हैं.
प्लास्टिक मुक्त बनाने का संकल्प लें
सीएम ने पत्र के अंत में सिंगल-यूज प्लास्टिक के खिलाफ एक बड़ा संदेश देते हुए सभी से अपील की है कि, इन छुट्टियों में प्लास्टिक मुक्त बनाने का भी संकल्प लें. यात्रा या पिकनिक के दौरान, कपड़े या जूट के थैलों का प्रयोग करें, प्लास्टिक कचरा इधर-उधर न फैलाएं और बच्चों को भी स्वच्छ एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दें. उन्होंने विश्वास जताया कि नागरिकों के छोटे-छोटे प्रयास ही भविष्य के बड़े परिवर्तन का आधार बनते है.


