Thursday, July 23, 2026

असम विधानसभा में UCC विधेयक बिल पास, शादी-तलाक और संपत्ति के नियमों में होगा बड़ा बदलाव

न्यूज डेस्क: असम विधानसभा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद यह कानून लाने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार ने विधानसभा सत्र के आखिरी दिन यह बिल पास कराया। बिल को लेकर सदन में काफी हंगामा हुआ। विपक्ष ने इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की, लेकिन सरकार ने बहुमत के आधार पर इसे पारित करा लिया।

Air Now के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें:-

शादी, तलाक और संपत्ति के नियमों में बदलाव

सरकार के अनुसार, इस कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक व्यवस्था लागू करना है। कानून लागू होने के बाद राज्य में शादी, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप और जमीन-जायदाद से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव होंगे। हालांकि, राज्य के आदिवासी समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। सरकार का कहना है कि ऐसा उनकी परंपराओं और संस्कृति की सुरक्षा के लिए किया गया है।

बहुविवाह पर पूरी तरह रोक

नए कानून में एक से अधिक शादी यानी बहुविवाह पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। अगर कोई व्यक्ति बहुविवाह का दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 82 के तहत कार्रवाई होगी। इसमें 7 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान रखा गया है। बिल के तहत पुरुषों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय की गई है। इसके अलावा अब शादी और तलाक का सरकारी रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। यदि कोई व्यक्ति रजिस्ट्रेशन नहीं कराता है, तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है।

धोखे से शादी करने पर भी सख्त सजा

कानून में जबरदस्ती, पहचान छिपाकर या डराकर शादी करने जैसे मामलों के लिए भी कड़ी सजा तय की गई है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह कानून समाज में समानता और कानूनी स्पष्टता लाने के लिए बनाया गया है। उनके अनुसार, शादी, तलाक और संपत्ति जैसे मामलों में अब सभी नागरिकों के लिए एक समान व्यवस्था लागू होगी। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और सामाजिक न्याय को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

विपक्ष ने जताई आपत्ति

विपक्षी दलों ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि इसे जल्दबाजी में पास कराया गया है। विपक्ष का कहना था कि इतने महत्वपूर्ण कानून को पहले सेलेक्ट कमेटी के पास भेजकर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए थी। हालांकि, सरकार ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इससे राज्य में कानून व्यवस्था और सामाजिक समानता को मजबूती मिलेगी।

यह भी पढ़ें: प बंगाल में टीएमसी को लगा बड़ा झटका, सांसद काकोली घोष ने पार्टी के सभी पदों से दिया इस्तीफा

Air Now के यूट्यूब चैनल को देखने के लिए यहां क्लिक करें:-

spot_img

एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
- Advertisement -spot_img

सोशल मीडिया

25,000FansLike
40,000FollowersFollow
500FollowersFollow
113,000SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

ट्रेंडिंग ख़बर