रांची : पूर्व मंत्री और झारखण्ड सरकार की समन्वय समिति के सदस्य बंधु तिर्की ने कहा है कि बिना किसी भेदभाव, बाधा या बंधन के आदिवासी, आदिवासी ही हैं और आदिवासियों के बीच भेदभाव डालने या दीवार खड़ा करने की कोई भी कार्रवाई असफल होगी.
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परिसीमन आदिवासी समाज के ऊपर आघात
बंधु तिर्की ने कहा कि परिसीमन, आदिवासी समाज के ऊपर एक ऐसा आघात है जिससे प्रभावी तरीके से निपटना और रणनीति बनाकर अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित सीटों की अनुपातिक संख्या को बरकरार रखना अथवा बढ़ाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है. यदि हम सभी इस मामले में गंभीर नहीं रहे तो विस्थापन, पलायन जैसी आपदाओं के बाद परिसीमन एक ऐसी विकट समस्या होगी जिसका खामियाजा संपूर्ण आदिवासी समाज को भुगतना पड़ेगा.
आदिवासियों की सामूहिक जिम्मेदारी
रांची प्रेस क्लब के सभाकक्ष में परिसीमन का आदिवासी समाज पर प्रभाव एवं संभावित समाधान विषय पर आयोजित एक महत्वपूर्ण सेमिनार को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि आदिवासियों के साथ ही संवैधानिक रूप से आरक्षित सीटों पर होनेवाले आघात से बचने के लिये हम सभी की सतर्कता और जागरूकता के साथ-साथ आपसी एकता-सद्भाव भी बहुत ज्यादा जरूरी है और हम सभी को यह समझना होगा कि संविधान प्रदत्त अपने अधिकारों और अपनी पहचान, अस्मिता आदि की रक्षा करना सभी आदिवासियों की सामूहिक जिम्मेदारी है.
30 संगठनों के प्रतिनिधि हुए शामिल
आज की बैठक में पूरे झारखण्ड के सभी जिले के 30 से अधिक संगठनों के अगुआओं ने भाग लिया. बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि अगले 2 अगस्त को राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित आदिवासी एकता महाजुटान रैली को बेहद सफल बनाने के लिये निरंतर बैठक आयोजित किया जायेगा.
बैठक में मुख्य रूप से इंडीजिनियस वूमेन इंडिया नेटवर्क की डाॅ. बासवी किड़ो, नारी शक्ति क्लब की मारग्रेट मिंज, आलोका कुजूर और लक्ष्मी खलखो, सिंहभूम आदिवासी समाज मोरहाबादी की सुषमा बिरली, बिरसा विकास जन कल्याण समिति के अनिल उरांव, पारम्परिक ग्राम सभा समन्वय समिति के बिरसा मुंडा, बिरसा मुंडा जल जंगल जमीन बचाओ समिति खूंटी के बरिंग हांसदा शामिल हुई.
इसके अलावा विस्थापित मुक्ति वाहिनी चांडिल डैम के नारायण गोप और पंचानन महतो, जन संग्राम मोर्चा के बिजय, नेशनल कमिटी फाॅर वीमेंस लीडर्स की अगस्टींग सोरेंग, सुमति सोरेंग और प्रमिला टेटे, झारखण्ड किसान परिषद की अश्विभा के साथ ही गोविन्द टोप्पो, अनिल अमिताभ पन्ना, इंद्रानी तिर्की, प्रीति मगडोली सांगा, रोमीज कंडुलना, पोलिना कुजूर, मोहित मोहन समद, संध्या सिंह, धीरेन्द्र नाथ शाहदेव, महेश डांगा आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये. जबकि ज्योत्सना केरकेट्टा ने धन्यवाद ज्ञापन किया.




