रांचीः झारखंड में आयोजित होने जा रहे शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में भोजपुरी,मगही और अंगिका भाषा को शामिल करने का मामला गहराता जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भले ही इस विवाद को दूर करने के लिए वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर के नेतृत्व में कमेटी का गठन कर दिया, लेकिन उस दल में शामिल सदस्यों की राय में ही मतभिन्नता नजर आ रही है। कमेटी में शामिल मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने इसका खुला विरोध किया है।
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उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि राज्य का गठन बिहार से अलग यहां की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए हुआ था। पिछले दो दशकों में हुए जनसांख्यिकीय परिवर्तनों या प्रवासन को आधार बनाकर पड़ोसी राज्यों की भाषाओं (जैसे भोजपुरी, मगही और अंगिका) को JTET में शामिल करना न्यायसंगत नहीं है।
उन्होंने इसके पीछे तर्क दिया कि जब इन भाषाओं को स्वयं बिहार लोक सेवा आयोग की सभी भर्तियों में अनिवार्य या आधिकारिक दर्जा प्राप्त नहीं है, तो इन्हें झारखंड के युवाओं पर थोपना और पात्रता का आधार बनाना राज्य के मूल निवासियों के रोजगार अवसरों और स्थानीय हितों के साथ समझौता करना होगा।


