झारखंड : गोड्डा में हुए पुलिस एनकाउंटर में मारे गए सूर्या हांसदा की मौत की सीबीआई जांच की मांग पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अभी तक जवाब दाखिल न करने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और सरकार को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया। यह मामला हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अम्बुज नाथ की अदालत में सुना गया।
Highlights:
कौन थे सूर्या हांसदा?
सूर्या हांसदा गोड्डा और आसपास के इलाकों में सक्रिय रहे व्यक्ति थे। उन पर हत्या, लूट और हथियार से जुड़े कई गंभीर मामलों में आरोप थे। वे भाजपा समेत अन्य राजनीतिक दलों के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उनके खिलाफ साहिबगंज के मिर्जा चौकी थाना और गोड्डा के ललमटिया थाना में कई एफआईआर दर्ज थीं।
क्या हुआ था 11 अगस्त को?
11 अगस्त 2025 को गोड्डा जिले में पुलिस और सूर्या हांसदा के बीच मुठभेड़ (एनकाउंटर) हुआ। पुलिस का दावा था कि सूर्या हांसदा को पकड़ने के लिए टीम गई थी। उन्होंने पुलिस पर फायरिंग की और जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई। इस दौरान सूर्या हांसदा गोली लगने से मारे गए। हालांकि, परिवार ने इस पूरी कहानी को झूठा बताया है।
परिवार का आरोप
सूर्या हांसदा की पत्नी सुशीला मुर्मू और मां नीलमुनी मुर्मू ने हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट दायर कर कहा कि सूर्या को पुलिस ने पहले पकड़ लिया था। इसके बाद हिरासत में ले जाकर उसकी हत्या की गई। बाद में एनकाउंटर की कहानी बनाई गई।परिवार ने इस घटना की CBI जांच की मांग की है, ताकि सच सामने आए।
हाईकोर्ट की सुनवाई में क्या हुआ?
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने बहस की। उन्होंने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और स्वतंत्र जांच जरूरी है। राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया था। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और कहा कि सरकार एक सप्ताह में विस्तृत जवाब दाखिल करे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई में सरकार की ओर से जवाब न आने पर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
कोर्ट की अगली सुनवाई में सरकार का जवाब सुनेगा। उसके बाद ही यह तय होगा कि जांच राज्य एजेंसी करेगी या मामला CBI को दिया जाएगा। यह केस राजनीतिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें चुनाव लड़ चुके व्यक्ति की मौत शामिल है।


