हजारीबाग : हजारीबाग में चर्चित वन भूमि घोटाला मामले में जेल में बंद IAS अधिकारी विनय चौबे की जमानत याचिका पर सोमवार को एसीबी की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की सभी दलीलें और तर्क सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब कोर्ट जल्द ही यह तय करेगी कि चौबे को जमानत मिलेगी या नहीं, जिससे पूरे राज्य की नजरें इस फैसले पर टिकी हुई हैं।
Highlights:
मामला क्या है?
IAS विनय चौबे पहले से ही शराब घोटाला और हजारीबाग खासमहल (सेवायत) जमीन घोटाला मामलों में आरोपी हैं। इन मामलों में कार्रवाई जारी रहने के बीच एसीबी ने 10 नवंबर को उन्हें वन भूमि घोटाला केस में भी अभियुक्त बना दिया। यह मामला हजारीबाग में उनके कार्यकाल के दौरान कथित रूप से फर्जी तरीके से वन भूमि ट्रांसफर और आवंटन से जुड़ा है।
एसीबी ने दर्ज किया नया केस
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इस मामले की प्राथमिक जांच (प्रिलिमिनरी इंक्वायरी) पूरी करने के बाद
कांड संख्या 11/2025 दर्ज की है। इस केस में कुल 73 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है, जिनमें कई बड़े नाम शामिल हैं IAS विनय चौबे, चौबे के करीबी विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह, हजारीबाग के विधायक प्रदीप प्रसाद, तत्कालीन सीओ शैलेश कुमार, ब्रोकर विजय सिंह और अन्य सरकारी कर्मचारी तथा निजी व्यक्ति। एसीबी का आरोप है कि इन सभी की मिलीभगत से सरकारी वन भूमि को गलत तरीके से खरीद-बिक्री और आवंटन में इस्तेमाल किया गया।
कोर्ट में क्या हुआ?
सोमवार को सुनवाई के दौरान एसीबी के विशेष लोक अभियोजक ने अदालत में तर्क दिया कि यह मामला करोड़ों की सरकारी जमीन की हेराफेरी से जुड़ा है। मुख्य आरोपी के रूप में विनय चौबे की भूमिका गंभीर है। जमानत मिलने से जांच प्रभावित हो सकती है। वहीं, चौबे के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल पर लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत हैं। इस मामले से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध साबित नहीं हुआ। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने फैसला आरक्षित कर लिया।
क्यों बढ़ी है मामले की अहमियत?
इस केस ने राज्य में एक बार फिर भू-घोटालों और सरकारी जमीन की बंदरबांट को चर्चा में ला दिया है। खासकर इसलिए कि विनय चौबे एक वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं और पहले भी कई घोटालों में उनका नाम जुड़ चुका है। इससे यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
आगे क्या?
अब सबकी नजरें स्पेशल एसीबी कोर्ट के फैसले पर हैं। अगर जमानत मिलती है, तो यह केस की दिशा बदल सकता है। अगर जमानत खारिज होती है, तो चौबे को जेल में रहकर ही आगे की कानूनी लड़ाई लड़नी होगी। जैसे ही कोर्ट अपना आदेश जारी करेगी, मामला और स्पष्ट हो जाएगा।


