Tuesday, July 21, 2026

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी समारोह शुरू, PM मोदी ने जारी किया स्मारक डाक टिकट और सिक्का

नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर बुधवार को दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में शताब्दी समारोह की शुरुआत हुई। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघ के योगदान को रेखांकित करते हुए विशेष स्मारक डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया।

संघ का 100 वर्षों का सफर

आरएसएस की स्थापना 27 सितंबर 1925 को नागपुर में डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने की थी। तब से लेकर आज तक संगठन देश-विदेश में लगातार विस्तार करता रहा है। आज RSS की शाखाएं 39 देशों में सक्रिय हैं और संगठन देश की सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

होसबाले का संबोधन

समारोह में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले का कहना है –
“संघ की 100 साल की यात्रा बेहद रोचक और प्रेरणादायी रही है। आज देश के हर हिस्से में स्वयंसेवक समाज के लिए सेवा कार्य कर रहे हैं। हमें किसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। संघ का कार्यकर्ता निस्वार्थ भाव से राष्ट्रहित में समर्पित होकर कार्य करता है। राष्ट्र ही सबकुछ है, व्यक्तिगत स्वार्थ कुछ नहीं।”

शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम

संघ ने दशहरे से शताब्दी वर्ष समारोह की शुरुआत की है। इस दौरान 2 अक्टूबर 2025 से 20 अक्टूबर 2026 तक देशभर में सात बड़े कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके अलावा संघ प्रमुख मोहन भागवत विदेश दौरे पर अमेरिका और यूरोप के कुछ देशों में भी शताब्दी समारोह से जुड़े कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं।

मोदी और RSS का रिश्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं RSS के प्रचारक रहे हैं। भाजपा में आने से पहले उन्होंने एक कुशल संगठनकर्ता के रूप में पहचान बनाई थी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपनी वैचारिक प्रेरणा RSS से लेती है और दोनों संगठनों के बीच वैचारिक और संगठनात्मक संबंध हमेशा गहरे रहे हैं।

ऐतिहासिक पड़ाव

RSS की यात्रा में कई महत्वपूर्ण पड़ाव आए – 1947 में स्वतंत्रता के बाद इसका तेजी से विस्तार हुआ, 1980 में जनसंघ समाप्त होकर भारतीय जनता पार्टी बनी, 1992 के राम जन्मभूमि आंदोलन से संघ और भाजपा का प्रभाव बढ़ा और 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद RSS से जुड़े विचारों का राष्ट्रीय राजनीति पर गहरा असर दिखा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का यह शताब्दी समारोह न सिर्फ संगठन के इतिहास और योगदान का उत्सव है, बल्कि आने वाले वर्षों में इसके सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रभाव को भी और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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एयर नाऊ स्पेशल

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