ढाका: बांग्लादेश में आज शाम बड़ा राजनीतिक दिन है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के अध्यक्ष तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं। शपथ समारोह से पहले संविधान सुधार परिषद को लेकर देश में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
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शपथ से पहले बढ़ा विवाद
BNP ने साफ किया है कि उसके सांसद केवल संसद सदस्य के रूप में शपथ लेंगे, लेकिन संविधान सुधार परिषद के सदस्य के तौर पर कोई शपथ नहीं लेंगे। इस फैसले के बाद जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजंस पार्टी (NCP) ने शपथ समारोह के बहिष्कार और विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। 12 फरवरी को हुए चुनाव में सांसदों के साथ जुलाई चार्टर पर भी जनमत संग्रह कराया गया था, जिसमें करीब 62% लोगों ने समर्थन दिया। इस चार्टर के अनुसार नई संसद 180 दिनों तक संविधान सभा की तरह काम कर सकती है और संविधान व लोकतांत्रिक संस्थाओं में बदलाव कर सकती है।
BNP की आपत्ति क्यों?
BNP नेताओं का कहना है कि संविधान में ऐसी परिषद का कोई प्रावधान नहीं है और न ही उसके लिए अलग शपथ का फॉर्मेट है। पार्टी के स्टैंडिंग कमिटी सदस्य सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि पहले संविधान संशोधन जरूरी है, उसके बाद ही परिषद कानूनी रूप से वैध होगी। जुलाई चार्टर के मुख्य प्रस्ताव में प्रधानमंत्री के लिए अधिकतम दो टर्म या 10 साल की सीमा है। प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष पद अलग रखना है। आपातकाल लागू करने से पहले कैबिनेट व विपक्ष की सहमति और राष्ट्रपति की भूमिका मजबूत करना है।
द्विसदनीय संसद (ऊपरी सदन) का गठन
इन प्रावधानों से प्रधानमंत्री की शक्तियों पर नियंत्रण और संस्थाओं में संतुलन लाने का उद्देश्य बताया गया है। बांग्लादेश की 13वीं संसद के नवनिर्वाचित सांसदों ने मंगलवार को शपथ ली। मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने सांसदों को शपथ दिलाई। शपथ समारोह कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजित हुआ, जिसमें 1,000 से ज्यादा मेहमान शामिल हुए।
शाम 4 बजे होगा मुख्य समारोह
मोहम्मद शहाबुद्दीन आज शाम राष्ट्रपति भवन में तारिक रहमान और उनके मंत्रिमंडल को शपथ दिलाएंगे। समारोह में भारत, चीन और पाकिस्तान समेत 13 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। भारत की ओर से ओम बिरला और विदेश सचिव विक्रम मिश्री भी मौजूद रहेंगे। बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के साथ ही संविधान सुधार को लेकर सियासी खींचतान तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह विवाद देश की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।


