Thursday, July 23, 2026

डेटा प्राइवेसी पर सुप्रीम कोर्ट व्हाट्सएप और मेटा पर हुई सख्त, दी कड़ी चेतावनी

दिल्ली: देश में नागरिकों की निजता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और सख्त रुख अपनाया है। व्हाट्सएप और उसकी पैरेंट कंपनी मेटा को अदालत ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि डेटा शेयरिंग के नाम पर भारतीय नागरिकों की प्राइवेसी से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह टिप्पणी व्हाट्सएप की विवादित टेक इट ऑर लीव इट प्राइवेसी पॉलिसी के खिलाफ लगी पेनल्टी को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान की। जिसमें यूजर्स को बिना किसी विकल्प के नई शर्तें स्वीकार करने के लिए मजबूर किया गया था। इसी पॉलिसी को लेकर पहले पेनल्टी लगाई गई थी, जिसके खिलाफ व्हाट्सएप और मेटा ने अपील दायर की है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह की पॉलिसी के जरिए यूजर्स की निजी जानकारी की चोरी हो रही है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि डेटा शेयरिंग के नाम पर नागरिकों की निजता के अधिकार के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि प्राइवेसी टर्म्स इतनी जटिल भाषा में लिखी जाती हैं कि आम यूजर उन्हें समझ ही नहीं पाता। इससे उपभोक्ताओं को गुमराह किया जाता है और उनकी जानकारी बिना सही सहमति के साझा की जाती है।

ऑप्ट-आउट पर उठाया सवाल

कोर्ट ने व्हाट्सएप और मेटा से सीधा सवाल किया ऑप्ट-आउट का विकल्प कहां है? अदालत ने कहा कि अगर कोई यूजर अपना डेटा शेयर नहीं करना चाहता, तो उसे बाहर निकलने का विकल्प क्यों नहीं दिया जाता। कोर्ट ने माना कि भारत में निजता का अधिकार संवैधानिक रूप से बेहद मजबूत और सख्ती से संरक्षित है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि ऐसे एग्रीमेंट पूरी तरह असमान हैं, जिनमें यूजर्स के पास कोई वास्तविक विकल्प नहीं होता। या तो शर्तें मानो या ऐप छोड़ दो, यह तरीका स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने कहा कि यह निजी डेटा की चोरी का एक सभ्य तरीका बन गया है, जिसे रोका जाना जरूरी है।

एकाधिकार और उपभोक्ता की मजबूरी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने व्हाट्सएप और मेटा पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि आपने एकाधिकार स्थापित कर लिया है और उपभोक्ताओं की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, “आप इस देश के संवैधानिक मूल्यों का मजाक उड़ा रहे हैं। उपभोक्ता के पास कोई विकल्प नहीं छोड़ा गया है। निजता के अधिकार के साथ इस तरह खिलवाड़ कैसे किया जा सकता है?” कोर्ट की इन सख्त टिप्पणियों से साफ है कि आने वाले समय में टेक कंपनियों की डेटा पॉलिसी पर और कड़ा रुख अपनाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि नागरिकों की निजता से जुड़ा कोई भी समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो सख्त आदेश भी दिए जा सकते हैं।

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एयर नाऊ स्पेशल

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