कोलकाता : पश्चिम बंगाल में भरतपुर के विधायक और तृणमूल कांग्रेस से निलंबित नेता हुमायूं कबीर आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सक्रिय नजर आ रहे हैं। पिछले दिनों राज्य में जल्द ही ‘तख्तापलट’ होने का दावा करने के बाद कबीर ने अब मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि वे किसी की गुलामी न करें और केवल अल्लाह की राह पर चलें। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अल्पसंख्यकों को धोखा देने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब मुसलमान समाज उन्हें कड़ा जवाब दे।
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ओवैसी के साथ गठबंधन की तैयारी
कबीर ने साफ किया कि विधानसभा चुनाव को लेकर उनकी नई पार्टी के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं और वे असदुद्दीन ओवैसी की एआइएमआइएम तथा नौशाद सिद्दीकी की आइएसएफ के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस गठबंधन के जरिए वे मुर्शिदाबाद की 17 सीटों पर निर्णायक जीत हासिल करेंगे। एक ओर जहां हुमायूं कबीर सियासी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर रविवार को उनके शक्तिपुर स्थित आवास पर पुलिसिया कार्रवाई से हड़कंप मच गया।
बेटा हुआ गिरफ्तार तो भड़के हुमायूं
मिली जानकारी के अनुसार विधायक के सुरक्षाकर्मी (कांस्टेबल) और हुमायूं कबीर के बीच छुट्टी को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद विधायक के बेटे गुलाम नबी आजाद उर्फ सोहेल ने कांस्टेबल के साथ मारपीट की। कांस्टेबल की शिकायत पर पुलिस ने विधायक के घर छापेमारी की और उनके बेटे को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर सीसीटीवी फुटेज भी जब्त कर ली है। हालांकि, हुमायूं कबीर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया कि सुरक्षाकर्मी ने ही उनके साथ दुर्व्यवहार किया था और उनके बेटे ने केवल बचाव में उसे बाहर निकाला था।
पुलिस की इस कार्रवाई से आक्रोशित हुमायूं कबीर ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने मुर्शिदाबाद के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को संबोधित करते हुए कहा कि यदि उनकी पत्नी और परिवार के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, तो वे बहरमपुर को पूरी तरह ठप कर देंगे और एसपी कार्यालय का घेराव करेंगे।
तृणमूल कांग्रेस ने अपनाया हमलावर रुख
दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर हमलावर रुख अपनाया है। पार्टी प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि यदि कोई पुलिसकर्मी पर हाथ उठाएगा, तो कानून अपना काम जरूर करेगा। दिलचस्प बात यह है कि हुमायूं कबीर टीएमसी छोड़ चुके हैं, लेकिन उनके बेटे गुलाम नबी अब भी टीएमसी के सक्रिय सदस्य और पंचायत समिति के पद पर तैनात हैं, जिससे यह पूरा मामला पारिवारिक और राजनीतिक जटिलताओं में उलझ गया है।


