झारखंड : झारखंड में कानून-व्यवस्था से जुड़े ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के 15 जिलों में विभिन्न पिकेट, थानों और अन्य सुरक्षा स्थलों पर तैनात 504 स्पेशल ऑक्सिलियरी पुलिस (SAP) जवानों की सेवा समाप्त कर दी गई है। यह कार्रवाई अनुबंध आधारित सेवा नियमों के तहत की गई है, क्योंकि इन सभी जवानों ने अपनी अधिकतम सात वर्ष की सेवा अवधि पूरी कर ली थी। साथ ही, सेवा विस्तार को लेकर इन्हें झारखंड हाईकोर्ट से भी कोई राहत नहीं मिल सकी।
Highlights:
कानूनी राहत नहीं मिलने के बाद फैसला
सैप जवानों ने सेवा विस्तार के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत से कोई अनुकूल आदेश नहीं मिलने के कारण अब सरकार ने उनकी सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह निर्णय पूरी तरह नियमों और अनुबंध शर्तों के आधार पर लिया गया है। 504 जवानों की सेवा समाप्त होने के बाद सैप बटालियनों की संख्या में बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी। वर्तमान स्थिति में सैप एक बटालियन में अब केवल 586 जवान बचे रहेंगे, जबकि सैप दो बटालियन में 698 जवान ही तैनात रहेंगे। इस कमी का सीधा असर जिला स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था, पिकेट ड्यूटी और थाना संचालन पर पड़ सकता है।
रांची में सबसे ज्यादा जवान हटाए जाएंगे
राजधानी रांची में सबसे अधिक सैप जवानों की सेवा समाप्त की गई है। 26 स्थानों पर तैनात 141 सैप जवान हटाए जाएंगे। रांची जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले जिले में इतनी बड़ी संख्या में जवानों की कमी को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चिंता जताई जा रही है।
अन्य जिलों में भी व्यापक असर
राज्य के अन्य जिलों में भी अलग-अलग स्थानों से सैप जवानों को हटाया जा रहा है। जैसे सरायकेला में 2 जगहों से 10 जवान, चाईबासा में 5 जगहों से 33 जवान, चतरा में 3 जगहों से 15 जवान, धनबाद में 1 जगह से 13 जवान और गिरिडीह में 2 जगहों से 12 जवान हटाए गए हैं। इन जिलों में खनन, औद्योगिक और नक्सल प्रभावित क्षेत्र शामिल हैं, जहां सैप की भूमिका अहम मानी जाती है।
नक्सल प्रभावित जिलों में भी कटौती
नक्सल गतिविधियों से प्रभावित माने जाने वाले जिलों में भी सैप जवानों की संख्या घटेगी। जैसे गुमला में 6 जगहों से 37 जवान, हजारीबाग में 6 जगहों से 39 जवान, लातेहार में 5 जगहों से 30 जवान और पलामू में 3 जगहों से 13 जवान
इन इलाकों में जवानों की कमी से सुरक्षा एजेंसियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।
औद्योगिक और शहरी क्षेत्र जैसे जमशेदपुर में 4 जगहों से 53 जवान, खूंटी में 4 जगहों से 18 जवान, लोहरदगा में 3 जगहों से 13 जवान, पाकुड़ में 2 जगहों से 14 जवान और रामगढ़ में 4 जगहों से 15 सैप जवान। इसके अलावा, झारखंड के अन्य जिलों में स्थित ट्रेनिंग सेंटरों में तैनात 50 सैप जवानों की सेवा भी समाप्त की जा रही है।
सरकार के सामने नई चुनौती
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में सैप जवानों की विदाई से राज्य में सुरक्षा प्रबंधन एक चुनौती बन सकता है। हालांकि, सरकार का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह नियमों के अनुसार है और वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है।
504 सैप जवानों की सेवा समाप्ति झारखंड की सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस कमी को कैसे पूरा करती है और जिला स्तर पर कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, यह मामला प्रशासनिक और सुरक्षा हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।


