रांची: झारखंड की राजधानी रांची के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान रिम्स ( RIMS ) की करोड़ों की बेशकीमती जमीन के महाघोटाले में जांच की आंच अब तेजी से फैल रही है। लगभग 7 एकड़ सरकारी जमीन को जाली दस्तावेजों के सहारे बेचने के आरोपी सोनू कुमार शरण ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की विशेष अदालत में अग्रिम जमानत की गुहार लगाई है।
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सोमवार को सोनू कुमार शरण की इस याचिका पर एसीबी कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने कड़ी रुख अपनाया और एसीबी को इस केस से संबंधित पूरी केस डायरी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित की है।
फर्जी वंशावली और जाली दस्तावेजों का खेल
रिम्स जमीन घोटाले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे भू-माफियाओं का एक बेहद संगठित सिंडिकेट सामने आ रहा है। एसीबी की अब तक की जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
भू-माफियाओं ने साल 1964-65 में अधिग्रहित की गई रिम्स की सरकारी जमीन को फर्जी वंशावली और जाली दस्तावेजों के सहारे अपनी निजी संपत्ति घोषित कर दिया। इसके बाद करोड़ों रुपये की इस सरकारी जमीन को बड़े-बड़े बिल्डरों को बेच दिया गया, जिस पर अवैध रूप से अपार्टमेंट और ऊंची इमारतें भी खड़ी कर दी गईं।
झारखंड हाई कोर्ट के बेहद कड़े और सख्त आदेश के बाद इस पूरे रैकेट की जांच एसीबी को सौंपी गई थी। हाई कोर्ट के आदेश के बाद हरकत में आई एसीबी ने कड़ा एक्शन लेते हुए अप्रैल महीने में इस महाघोटाले के 4 मुख्य किरदारों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया था। गिरफ्तार होने वालों में फर्जी वंशावली तैयार करने वाले कार्तिक बड़ाईक, राज किशोर बड़ाईक, पावर ऑफ अटार्नी का खेल रचने वाला चेतन कुमार और बिचौलिया राजेश कुमार झा शामिल हैं।
रडार पर हैं 16 सरकारी अधिकारी और कर्मचारी
इस घोटाले की जड़ें सिर्फ जमीन दलालों और बिल्डरों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें सरकारी तंत्र की मिलीभगत की बू आ रही है। बिना सरकारी अफसरों की साठगांठ के इतनी बड़ी सरकारी जमीन का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) और रजिस्ट्री होना नामुमकिन था।
इस मामले में रांची नगर निगम, निबंधन (रजिस्ट्री) कार्यालय, अंचल कार्यालय (बड़गाई अंचल) और रिम्स प्रबंधन के लगभग 16 सरकारी अधिकारी और कर्मचारी सीधे तौर पर एसीबी के रडार पर हैं। इस मामले में करोड़ों रुपये के अवैध वित्तीय लेनदेन का अंदेशा है। यही वजह है कि प्रवर्तन निदेशालय ( ED ) ने भी इस मामले में अपनी एंट्री मारते हुए ईसीआईआर ( ECIR ) दर्ज कर ली है।
सोनू कुमार शरण की अग्रिम जमानत याचिका पर अब पूरे झारखंड की निगाहें टिकी हैं। यदि 8 जुलाई को कोर्ट से राहत नहीं मिलती है, तो एसीबी इस सिंडिकेट से जुड़े कई और सफेदपोशों और भू-माफियाओं को दबोचने की तैयारी में है।
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