Tuesday, September 15, 2026

महागठबंधन में दरार!तेजस्वी की सीएम कुर्सी क्यों छीन रहे हैं राहुल?

बिहार विधानसभा चुनाव : बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की सियासत में जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां भाजपा के नेतृत्व वाला NDA गठबंधन पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी महागठबंधन अंदरूनी मतभेदों से जूझ रहा है। खास बात यह है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी इस महत्वपूर्ण समय में 10 दिनों के विदेश दौरे पर गए हुए थे। बता दे, राहुल गांधी दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप के चार देशों की यात्रा पर थे जहां उनका प्रमुख नेताओं, छात्रों और व्यापारियों से मुलकात एवं संवाद का कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इधर बिहार में अब तक उन्होंने बिहार चुनाव को लेकर कोई बैठक या रणनीतिक विमर्श नहीं किया है।

bihar mahagathbandhan 1760102363901
तेजस्वी से नाराज राहुल

RJD और कांग्रेस में सीट को मतभेद

RJD और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है। सूत्रों के अनुसार RJD इस बार कांग्रेस को उतनी सीटें देने को तैयार नहीं है, जितनी पिछली बार 2020 के चुनाव में दी गई थीं। यानी 2020 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 110 सीट मिली थी लेकिन इस बार 58 सीट दी जा सकती है. वहीं कांग्रेस नेतृत्व का रुख साफ है कि अगर सम्मानजनक सीटें नहीं मिलीं, तो पार्टी गठबंधन पर पुनर्विचार कर सकती है। वही दूसरी तरफ तेजस्वी यादव ने बिहार स्तर की तैयारी तेज कर दी है जिसमे हाल ही हुए प्रेस कांफ्रेंस में एक व्याख्या खूब चला, प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा की अगले 20 महीने में हर घर को 1 सरकारी नौकरी दी जाएगी. इसपर भी प्रतिपक्ष पार्टी ने जमकर तेजस्वी पर तंज़ कसा।

जन सुराज को फ़ायदा 

अब आरजेडी और जेडीयू के अलावा एक और पार्टी निखर कर आ रही जिसका नाम जनसुराज पार्टी है। चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने अपनी जन सुराज पार्टी की पहली उम्मीदवार की सूची जारी कर दी है, जिसमें कई अहम सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की गई है। साथ ही पहली लिस्ट में 51 कैंडिडेट्स में से 49 कैंडिडेट्स ऐसे है जो चुनाव पहली बार लड़ रहे है. संभावना जताई जा रही है कि प्रशांत किशोर खुद भी चुनावी मैदान में उतर सकते हैं, हालांकि उन्होंने अपनी सीट का खुलासा अभी नहीं किया है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वे अपने जन्मभूमि करगहर या कर्मभूमि राघोपुर से चुनाव लड़ सकते हैं। दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के एक बार फिर राघोपुर से चुनाव लड़ने की संभावना है। ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि कहीं प्रशांत किशोर और तेजस्वी यादव आमने-सामने न आ जाएं, जिससे राज्य में एक नई राजनीतिक टक्कर देखने को मिल सकती है।

NDA सीटों का बंटवारा लगभग तय 

वहीं NDA में सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से चल रहा है। हाल ही में दिल्ली में हुई NDA की अहम बैठक में चिराग पासवान को भी मना लिया गया है। 2020 के चुनाव में अकेले लड़ने वाले चिराग इस बार पूरी तरह से NDA के साथ रहेंगे। माना जा रहा है कि उन्हें उनके पिता रामविलास पासवान की राजनीतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए सम्मानजनक सीटें दी जाएंगी। सूत्रों की माने तो बीजेपी, जेडीयू, हम (HAM) और लोजपा (रामविलास) के बीच सीटों का बंटवारा लगभग तय हो चुका है। एनडीए की बैठक के बाद यह भी स्पष्ट हो गया कि बीजेपी इस चुनाव में पीएम मोदी के चेहरे को सामने रखकर चुनाव लड़ेगी। रणनीति यह है कि राज्य की सभी सीटों पर NDA एकजुट होकर चुनाव लड़े, ताकि विपक्ष को टुकड़ों में बांटा जा सके।

महागठबंधन की  कमजोर स्थिति का फायदा जन सुराज को 

महागठबंधन की कमजोर स्थिति का फायदा प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी को भी मिल सकता है। PK लंबे समय से बिहार में जनसंवाद यात्रा कर रहे हैं और उनकी पार्टी ने उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया को पारदर्शी बताया है। उनकी सूची में पढ़े-लिखे, सामाजिक रूप से सक्रिय और भ्रष्टाचार-विरोधी छवि वाले उम्मीदवारों को तरजीह दी गई है। वे विकास, शिक्षा और नौकरियों के मुद्दे को प्रमुख चुनावी मुद्दा बना रहे हैं। RJD की ओर से तेजस्वी यादव ने पार्टी की आंतरिक बैठकों में साफ संकेत दिया है कि अगर कांग्रेस ने समय रहते स्पष्ट रुख नहीं अपनाया यानि सीएम और deputy सीएम , तो RJD अकेले भी चुनावी मैदान में उतरने से पीछे नहीं हटेगी। यह बयान महागठबंधन में दरार को और गहरा करने वाला माना जा रहा है।

इस बीच, बिहार की जनता के सामने अब कई विकल्प हैं। एक ओर NDA है जो केंद्र और राज्य में स्थायित्व का दावा कर रहा है। दूसरी ओर RJD है जो बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक न्याय के मुद्दे को उठा रही है। तीसरा विकल्प जनसुराज के रूप में उभर रहा है, जो राजनीति में एक नई शैली लाने का दावा कर रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगर कांग्रेस जल्दी निर्णय नहीं लेती, तो वह न केवल महा गठबंधन से बाहर हो सकती है, बल्कि उसका जनाधार भी और कमजोर हो जाएगा। वहीं अगर RJD और कांग्रेस का गठबंधन टूटता है, तो इसका सीधा फायदा भाजपा और NDA को मिल सकता है।

spot_img

एयर नाऊ स्पेशल

Big Breaking News: एक करोड़ का इनामी नक्सली मिशिर...

रांची: झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है. प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के सेंट्रल कमेटी सदस्य और...
- Advertisement -spot_img

सोशल मीडिया

25,000FansLike
40,000FollowersFollow
500FollowersFollow
113,000SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

ट्रेंडिंग ख़बर