राँची: झारखंड के बहुचर्चित बड़गाई जमीन घोटाला मामले में आरोपी और पूर्व राजस्व कर्मचारी भानु प्रताप प्रसाद की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। शनिवार को झारखंड हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भानु प्रताप की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के इतने गंभीर आरोपों के बीच आरोपी को राहत देना न्यायसंगत नहीं होगा।
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जांच प्रभावित होने का खतरा- हाई कोर्ट
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि भानु प्रताप प्रसाद पर लगे आरोप न केवल गंभीर हैं, बल्कि राज्य के प्रशासनिक ढांचे में सेंधमारी की ओर इशारा करते हैं। कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर जोर दिया। पहला ईडी (ED) और अन्य एजेंसियां इस समय घोटाले की परतों को खोल रही हैं। ऐसे में मुख्य आरोपी की रिहाई से साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना बनी रहती है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि इस मामले का ट्रायल जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि मामले का खुलासा हो सके।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद बड़गाई अंचल की बेशकीमती जमीनों के दस्तावेजों में हेराफेरी से जुड़ा है। आरोप है कि भानु प्रताप प्रसाद ने राजस्व कर्मचारी (CI) के पद पर रहते हुए सरकारी रजिस्टरों में छेड़छाड़ की और असली दस्तावेजों को फाड़कर या बदलकर फर्जी रिकॉर्ड दर्ज किए गए। साथ ही प्रभावशाली लोगों और जमीन माफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए कागजों में अवैध तरीके से बदलाव किए। वहीं ईडी की जांच में यह बात सामने आई है कि इन फर्जी सौदों के जरिए करोड़ों रुपयों की अवैध कमाई की गई। भानु प्रताप प्रसाद के पास से छापेमारी के दौरान कई ऐसे संदिग्ध रजिस्टर और दस्तावेज बरामद हुए थे, जिनका सीधा संबंध राज्य के रसूखदार लोगों से जुड़े जमीन सौदों से था।
जांच की तपिश और बढ़ी
भानु प्रताप प्रसाद लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं। उनकी जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब जांच एजेंसियों का शिकंजा और कसने की उम्मीद है। ईडी पहले ही इस मामले में कई वीआईपी और बिचौलियों से पूछताछ कर चुकी है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब यह साफ है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनी लड़ाई और भी लंबी और सख्त होने वाली है।
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