मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को VIT भोपाल यूनिवर्सिटी में खराब पीने के पानी और जॉन्डिस के बढ़ते मामलों को लेकर हुए छात्र विरोध का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। उच्च शिक्षा मंत्री (Minister of Higher Education) इंदर सिंह परमार ने साफ कहा कि स्टूडेंट्स के खिलाफ किसी भी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि समस्या स्टूडेंट्स के कारण नहीं हुई है, बल्कि यूनिवर्सिटी प्रशासन की गंभीर लापरवाही की वजह से हालात बिगड़े हैं।
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फोर वाटर सप्लाई प्वाइंट दूषित पाए गए
विधानसभा में जानकारी देते हुए मंत्री परमार ने बताया कि यूनिवर्सिटी में पानी की जांच के दौरान 18 में से 4 पानी सप्लाई पॉइंट में बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई, जो स्टूडेंट्स की सेहत के लिए बड़ा खतरा था। उन्होंने कहा कि नए सैंपल 26 नवंबर को लिए गए थे और जांच में यह स्पष्ट हुआ कि पानी सुरक्षित नहीं था। रजिस्ट्रार को तुरंत सभी पॉइंट्स की सफाई करके नई रिपोर्ट देने का आदेश दिया। साथ ही जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (Public Health Engineering Department) के इंजीनियर को दोबारा पानी के सैंपल लेकर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

36 छात्रों में मिले जॉन्डिस के लक्षण
यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड के अनुसार, अभी तक 36 स्टूडेंट्स में जॉन्डिस के लक्षण पाए गए हैं। जिनमें 23 मेल स्टूडेंट्स और 13 फीमेल स्टूडेंट्स शामिल हैं। हालांकि, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पहले पानी में किसी भी तरह की खराबी से इनकार किया था। यूनिवर्सिटी प्रवक्ता ने दावा किया कि सैंपल Hostel-1 से लिए गए थे, जहां जॉन्डिस का एक भी मामला नहीं मिला।

मामला क्या है
दरअसल, 25 नवंबर को कैंपस में खराब पानी की स्थिति से परेशान होकर लगभग 4,000 स्टूडेंट्स ने विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रशासन बीमारी के मामलों को छिपाता रहा, जिससे नाराजगी बढ़ती गई। स्टूडेंट्स की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई। इसी वजह से स्टूडेंट्स का गुस्सा भड़का और प्रदर्शन ने गंभीर रूप ले लिया।

मंत्री परमार ने बताया कि यूनिवर्सिटी के खिलाफ पहले भी कई शिकायतें आई थीं। एक मामले में यूनिवर्सिटी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। यूनिवर्सिटी प्रवक्ता का कहना है कि यह जुर्माना उन पर कोर्स से जुड़े ऑर्डिनेंस नियमों का पालन न करने के कारण लगाया गया था। प्रवक्ता का दावा है कि उन्होंने नियमों के अनुसार आवेदन किया था। निरीक्षण टीम परिसर आई थी, इसके बावजूद जुर्माना लगा दिया गया था।
पहले सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

विधानसभा में कांग्रेस नेता हेमंत सत्यदेव कटारे और दिनेश जैन ने सरकार से पूछा कि यूनिवर्सिटी पर पहले सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई? स्टूडेंट्स की शिकायतों के बावजूद स्थिति को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया? कांग्रेस ने आरोप लगाया कि VIT यूनिवर्सिटी एक किले की तरह बना है। यहां तक कि जिला मुख्य चिकित्सा (District Chief Medical) और स्वास्थ्य अधिकारी को भी दो घंटे तक गेट पर रोका गया।

मंत्री परमार ने स्वीकार किया कि यूनिवर्सिटी में लंबे समय से शिकायतें मिलती रही हैं की सामान्य परिस्थितियों में भी बाहरी लोगों का प्रवेश मुश्किल है और यह सिस्टम मानवीय दृष्टिकोण से गलत है। उन्होंने कहा कि जैसे ही समिति की रिपोर्ट आई, उन्होंने मुख्यमंत्री से चर्चा कर उसी दिन सख्त कार्रवाई का फैसला किया।
मंत्री परमार ने कहा कि यह कार्रवाई सिर्फ VIT भोपाल के लिए नहीं है, बल्कि सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए चेतावनी है। अगर कोई भी यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स से दुर्व्यवहार करेगा या उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ करेगा, तो सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी।


